27 मंदिर तोड़कर मस्जिद निर्माण के दावे के साथ हिंदू संगठनों ने तेज की कानूनी तैयारी
मध्य प्रदेश की भोजशाला में हिंदुओं को पूजा की अनुमति मिलने के बाद अब कुतुब मीनार परिसर को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। हिंदू संगठनों ने दावा किया है कि परिसर में आज भी हिंदू देवी-देवताओं के चिन्ह, खंडित मूर्तियां और प्राचीन मंदिरों के अवशेष मौजूद हैं। इसी आधार पर यहां पूजा-अर्चना के अधिकार की मांग तेज हो गई है।
विष्णु शंकर जैन से मिलेगी प्रतिनिधिमंडल
यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के प्रतिनिधिमंडल के जल्द ही वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन से मुलाकात करने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुतुब मीनार परिसर में पूजा की अनुमति को लेकर नई कानूनी रणनीति तैयार की जाएगी। संगठन का कहना है कि भोजशाला मामले की तरह यहां भी हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को मान्यता मिलनी चाहिए।
पहले भी अदालत पहुंच चुका है मामला
विष्णु शंकर जैन ने वर्ष 2020 में साकेत कोर्ट में पूजा की अनुमति को लेकर याचिका दायर की थी। हालांकि 2023 में अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी। बाद में दोबारा याचिका दाखिल की गई, जिस पर सुनवाई लंबित है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि परिसर में मौजूद लौह स्तंभ भगवान विष्णु मंदिर का हिस्सा था और आसपास के ढांचे हिंदू एवं जैन मंदिरों को तोड़कर बनाए गए थे।
27 मंदिर तोड़ने का दावा
एएसआई के पूर्व निदेशक डॉ. धर्मवीर शर्मा के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कुतुबुद्दीन ऐबक ने 27 हिंदू और जैन मंदिरों को ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया था। परिसर में मौजूद शिलालेखों और स्तंभों को इसका प्रमाण बताया जा रहा है।
सोशल मीडिया से राजनीति तक हलचल
इस मुद्दे के सामने आने के बाद दिल्ली की राजनीति और धार्मिक संगठनों में बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर #QutubMinar और #PujaRights तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं। कुछ लोग इसे ऐतिहासिक न्याय की मांग बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे नए विवाद को जन्म देने वाला मुद्दा मान रहे हैं। अब सबकी नजर अदालत की अगली सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
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