होटवार जेल में महिला बंदी के यौन शोषण का आरोप, बाबूलाल मरांडी ने सीएम से मांगी निष्पक्ष जांच

होटवार जेल में महिला बंदी के यौन शोषण का आरोप, बाबूलाल मरांडी ने सीएम से मांगी निष्पक्ष जांच

Johar News Times
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बाबूलाल मरांडी ने रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार जेल) के अधीक्षक पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया है कि जेल अधीक्षक ने एक महिला बंदी का मानसिक और शारीरिक शोषण किया, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग की है।

बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि उनके पास पूरे मामले से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और यह एक “संस्थागत अपराध” है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण है। साथ ही उन्होंने जेल आईजी पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दोषी अधिकारी को बचाने के लिए फाइलों को गायब किया जा रहा है और मामले को दबाने की कोशिश हो रही है। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि महिला बंदी को बीमारी और इलाज के बहाने जेल से बाहर गुप्त स्थानों और अस्पतालों में ले जाया जा रहा है, ताकि संभावित जैविक और फॉरेंसिक साक्ष्यों को नष्ट किया जा सके। हालांकि, रविवार को जेल प्रशासन की ओर से महिला की गर्भावस्था की जांच कराई गई, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव बताई गई है।

जानकारी के अनुसार, ब्राउन शुगर तस्करी मामले में सुखदेव नगर पुलिस ने 7 नवंबर 2025 को महिला को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे होटवार जेल भेजा गया। जेल प्रशासन के मुताबिक 28 अप्रैल को उसने पेट दर्द की शिकायत की थी। बाद में 12 मई को उसने महिला बंदियों के बीच अपने साथ गलत होने की बात कही, जिसके बाद मामला जेल परिसर में फैल गया। मामले की जानकारी जेलर लवकुश कुमार तक पहुंची, जिसके बाद महिला डॉक्टर अपराजिता के नेतृत्व में मेडिकल टीम बनाकर जांच कराई गई। जेल अधीक्षक के. चंद्रशेखर ने 13 मई को जेल आईजी सुदर्शन मंडल को इसकी सूचना दी। ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड सहित मेडिकल जांच में महिला के गर्भवती होने की पुष्टि नहीं हुई।

जेल अधीक्षक के चंद्रशेखर ने सभी आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि महिला बंदी से उनकी कभी मुलाकात तक नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला जेल में वीआईपी सुविधा, मोबाइल और ड्रग्स की मांग कर रही थी और सुविधा नहीं मिलने पर फंसाने की धमकी दे रही थी। अधीक्षक ने कहा कि किसी भी स्तर की जांच कराई जा सकती है और अगर आरोप साबित नहीं हुए तो मानहानि का मुकदमा किया जाएगा।

वहीं जेल चिकित्सक डॉ. मुकेश ने बताया कि महिला की ब्लड जांच और अल्ट्रासाउंड कराया गया, लेकिन गर्भावस्था की पुष्टि नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब कोर्ट से अनुमति लेकर किसी सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से दोबारा जांच कराई जाएगी, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

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