तमिलनाडू विधानसभा चुनाव में बहुमत का सस्पेंस भले खत्म हो गया हो, लेकिन एक सीट को लेकर सियासी और कानूनी घमासान अभी जारी है। तमिलझा वेत्री कड़गम (टीवीके) के उम्मीदवार श्रीनिवासा सेतुपति से सिर्फ एक वोट से हारने वाले डीएमके नेता और पूर्व मंत्री के. आर. पेरियाकरुप्पन ने मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
पेरियाकरुप्पन ने मतगणना प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि श्रीनिवासा सेतुपति को 13 मई या उससे पहले होने वाली विश्वास मत प्रक्रिया में शामिल होने से रोका जाए।
मद्रास हाईकोर्ट में बनेगी स्पेशल बेंच
मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका स्वीकार कर ली है। सुनवाई के लिए जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन. सेंथिलकुमार की विशेष पीठ गठित की गई है। मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के बाद रविवार को इस मामले पर सुनवाई होने की संभावना है।
सिर्फ एक वोट से हुई थी हार-जीत
तिरुपत्तूर विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद रोमांचक रहा था। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार टीवीके प्रत्याशी श्रीनिवासा सेतुपति को 83,375 वोट मिले थे, जबकि डीएमके उम्मीदवार के. आर. पेरियाकरुप्पन को 83,374 वोट प्राप्त हुए। यानी जीत और हार का अंतर सिर्फ एक वोट रहा।
चुनाव आयोग ने इस सीट पर टीवीके उम्मीदवार को विजेता घोषित किया था।
विजय सरकार के लिए क्यों अहम है यह सीट?
यह सीट अभिनेता-राजनेता विजय और उनकी पार्टी टीवीके के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी ने इस चुनाव में 108 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, लेकिन पहले ही एक सीट कम होने के बाद उसका आंकड़ा 107 पर पहुंच चुका है।
अगर यह सीट भी हाथ से निकलती है तो टीवीके की संख्या घटकर 106 हो जाएगी। हालांकि सहयोगी दलों के समर्थन के साथ विजय के पास अभी 121 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है, लेकिन एक सीट कम होने पर यह संख्या 120 तक पहुंच सकती है।
ऐसे में आगामी विश्वास मत प्रक्रिया के दौरान विजय सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और सत्ता संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।











