जब छऊ नृत्य में अपनी रचना देखकर भावुक हो उठे थे कवि गुरु रवींद्रनाथ ठाकुर

जब छऊ नृत्य में अपनी रचना देखकर भावुक हो उठे थे कवि गुरु रवींद्रनाथ ठाकुर

Johar News Times
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कला, संगीत और संस्कृति के प्रति गहरा लगाव रखने वाले रवींद्रनाथ ठाकुर का संबंध भले ही सीधे सरायकेला की धरती से नहीं रहा, लेकिन सरायकेला की विश्वप्रसिद्ध छऊ नृत्य शैली ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया था। वर्ष 1941 में पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सरायकेला के कलाकारों ने कवि गुरु के सामने छऊ नृत्य की ऐसी प्रस्तुति दी कि वह भाव-विभोर हो उठे।

‘कच और देवयानी’ की प्रस्तुति ने जीता था दिल

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उस समय सरायकेला राजघराने के कुमार विजय प्रताप सिंहदेव के नेतृत्व में रॉयल छऊ डांस समूह ने “कच और देवयानी” पर आधारित छऊ नृत्य प्रस्तुत किया था। इस प्रस्तुति की खास बात यह थी कि इसकी मूल प्रेरणा कवि गुरु की रचना “विदाई अभिशाप” से ली गई थी।

जब कलाकारों ने मंच पर अपनी अद्भुत भाव-भंगिमाओं, मुखौटों और नृत्य शैली के माध्यम से कथा को जीवंत किया, तब रवींद्रनाथ ठाकुर बेहद भावुक हो गए थे। उन्होंने न केवल इस प्रस्तुति की जमकर सराहना की, बल्कि कलाकारों की प्रतिभा की भी खुले दिल से प्रशंसा की थी।

‘भिक्षुक’ नृत्य की भी हुई थी प्रस्तुति

“कच और देवयानी” के अलावा कलाकारों ने कवि गुरु के समक्ष “भिक्षुक” नृत्य भी प्रस्तुत किया था। बताया जाता है कि इस प्रस्तुति ने भी वहां मौजूद लोगों को काफी प्रभावित किया। उस ऐतिहासिक अवसर की एक तस्वीर आज भी सरायकेला के छऊ नृत्य केंद्र में सहेज कर रखी गई है, जो उस गौरवपूर्ण पल की याद दिलाती है।

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टैगोर की पुस्तक में भी मिलता है सरायकेला छऊ का उल्लेख

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित छऊ गुरु तपन पटनायक बताते हैं कि रवींद्रनाथ ठाकुर की एक पुस्तक में भी सरायकेला छऊ का उल्लेख मिलता है। उन्होंने बताया कि 1980 के दशक में उन्होंने सरायकेला, मानभूम और मयूरभंज- छऊ की तीनों प्रमुख शैलियों को मिलाकर “कच और देवयानी” प्रसंग पर विशेष कोरियोग्राफी भी तैयार की थी। इस प्रस्तुति का कई मंचों पर सफल प्रदर्शन किया जा चुका है।

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