चांडिल डैम में 180-181 मीटर ही रहेगा पानी, इस बार नहीं डूबेंगे विस्थापितों के गांव: SDO

"विस्थापितों के हक की आवाज: चांडिल डैम के जलस्तर पर प्रशासन का बड़ा फैसला, करोड़ों का जलकर दबाए बैठी कंपनियों पर भी उठे सवाल।"

Johar News Times
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सरायकेला/चांडिल: चांडिल अनुमंडल कार्यालय सभागार में शुक्रवार को अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में मानसून के दौरान उत्पन्न होने वाली बाढ़ की स्थिति और विस्थापितों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा की गई। बैठक में प्रशासन द्वारा निर्णय लिया गया कि इस वर्ष चांडिल डैम का जलस्तर 180 से 181 मीटर के बीच ही सीमित रखा जाएगा, ताकि किसी भी विस्थापित गांव या परिवार को डूबने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

बैठक में विधायक सविता महतो और वरीय अधिकारी रहे मौजूद

इस उच्चस्तरीय बैठक में ईचागढ़ की विधायक सविता महतो, सुवर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना चांडिल के वरिष्ठ पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी , प्रखंड विकास पदाधिकारी , अंचल अधिकारी , बिजली विभाग के सहायक अभियंता और चिकित्सा पदाधिकारी के साथ-साथ बड़ी संख्या में विस्थापित और क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित थे।

35-40 साल पुराना दर्द: हर बरसात में जलमग्न होते हैं दर्जनों गांव

बैठक के दौरान विस्थापितों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि पिछले 35-40 वर्षों से वे हर बरसात में तबाही झेल रहे हैं। डैम का जलस्तर बढ़ने से दर्जनों विस्थापित गांव पानी में डूब जाते हैं। विस्थापितों का आरोप है कि इतने दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला, न पुनर्वास के तहत नौकरी दी गई और न ही विस्थापित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

विस्थापितों का गंभीर आरोप: ‘कंपनियों को पानी, विस्थापित पानी में’

स्थानीय ग्रामीणों और विस्थापितों ने सुवर्णरेखा परियोजना के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन का पूरा ध्यान विस्थापितों को बचाने के बजाय उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने पर है।

आरोप है कि विभिन्न औद्योगिक कंपनियों और फैक्ट्रियों पर करोड़ों रुपये का जलकर बकाया है। इसके बावजूद उन्हें धड़ल्ले से पानी की सप्लाई की जा रही है, जबकि गरीब विस्थापितों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।

विधायक ने दिए जल्द समाधान के निर्देश

बैठक में मौजूद ईचागढ़ विधायक सविता महतो ने विस्थापितों की मांगों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और सुवर्णरेखा परियोजना के अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिया कि विस्थापितों की मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास जैसी न्यायसंगत समस्याओं का योजनाबद्ध तरीके से जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकाला जाए।

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