रांची: झारखंड के शहरी विकास और बिजली व्यवस्था को आने वाले दिनों में एक बड़ी रफ्तार मिलने वाली है। केंद्रीय शहरी विकास एवं विद्युत मंत्री मनोज लाल ने रांची के होटल बीएनआर में नगर विकास एवं आवास विभाग तथा ऊर्जा विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि केंद्र की नई और महत्वाकांक्षी योजना ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत झारखंड को करीब 7,600 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मिल सकती है।
योजनाएं बेहतर हुईं तो फंड होगा चार गुना
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस योजना के पहले चरण में झारखंड के लिए 1,900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लेकिन यदि राज्य सरकार बेहतरीन और प्रभावी कार्य योजनाएं बनाकर केंद्र को भेजती है, तो यह राशि चार गुना तक बढ़कर 7,600 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इस पूरे फंड में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत होगी, जबकि शेष 75 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और विभिन्न वित्तीय संस्थानों के सहयोग से जुटाई जाएगी।
इन बुनियादी सुविधाओं पर रहेगा मुख्य फोकस
इस विशाल फंड का इस्तेमाल झारखंड के शहरों को आधुनिक और सुविधायुक्त बनाने के लिए किया जाएगा। इसके तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों पर जोर रहेगा:
- सीवरेज और ड्रेनेज: शहरों में जलजमाव की समस्या से मुक्ति के लिए आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम।
- जलापूर्ति : हर घर तक शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- शहरी परिवहन : सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत और सुलभ बनाना।
डीवीसी क्षेत्र के 6 जिलों के लिए बनेगा ‘ज्वाइंट एक्शन प्लान’
बैठक में दामोदर वैली कॉर्पोरेशन कमांड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले झारखंड के छह जिलों के विकास पर भी सहमति बनी है। इसके तहत राज्य के बिजली विभाग और डीवीसी के बीच एक संयुक्त उपक्रम बनाया जाएगा, जो इन जिलों में बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए काम करेगा।
30 हजार घरों में दौड़ेगी बिजली, जहां ग्रिड नहीं वहां सोलर पावर
ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों के लिए बैठक में एक और बड़ा फैसला लिया गया। राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 30,000 नए बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन सुदूर पहाड़ियों या जंगलों में पारंपरिक बिजली के तार या पोल पहुंचाना संभव नहीं होगा, वहां सौर ऊर्जा के माध्यम से शत-प्रतिशत बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
झारखंड ने मांगी विशेष रियायत
समीक्षा बैठक के दौरान झारखंड के नगर विकास मंत्री ने राज्य की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से विशेष रियायत की मांग की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि झारखंड को विशेष श्रेणी का राज्य मानते हुए नियमों में थोड़ी नीतिगत शिथिलता दी जाए, ताकि विकास कार्यों की फाइलें न अटकें और काम तेजी से पूरा हो सके।
