जिले के चांडिल अनुमंडल में उजागर हुआ फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाला गहराता जा रहा है। जांच के दौरान अब ग्राम पंचायत ‘रुचप’ से जारी एक संदिग्ध प्रमाण पत्र सामने आया है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। सुकुरमानी कर्मकार के नाम से जारी इस प्रमाण पत्र ने इस रैकेट के काम करने के तरीके की पोल खोल दी है।
फर्जीवाड़े के तीन बड़े सबूत
जांच में सुकुरमानी कर्मकार (जन्म तिथि 20-04-2010) के प्रमाण पत्र में कई ऐसी खामियां मिली हैं जो सीधे तौर पर इसे फर्जी साबित करती हैं:
- प्रमाण पत्र पर ‘डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स & स्टेटिस्टिक्स’ लिखा है, जबकि नियमतः यह पंचायत सचिव या रजिस्ट्रार द्वारा जारी होना चाहिए।
- माता के आधार नंबर के स्थान पर अधूरा विवरण (XXXX-XX) दिया गया है, जो फर्जी दस्तावेजों की पहचान है।
- सरकारी दस्तावेजों के विपरीत, इस प्रमाण पत्र में हिंदी और अंग्रेजी में एक ही जानकारी को दो-दो बार दोहराया गया है।
करोड़ों के खेल का अनुमान
ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विस्थापित अधिकार मंच के नेता राकेश रंजन महतो ने आरोप लगाया है कि यह केवल एक प्रमाण पत्र की बात नहीं है। रसूनिया, चांडिल और अब रुचप पंचायत में यह धंधा धड़ल्ले से चल रहा था। एक प्रमाण पत्र के लिए ₹3,500 से लेकर ₹15,000 तक वसूले गए। आशंका जताई जा रही है कि यह पूरा घोटाला ₹1.15 करोड़ से भी अधिक का हो सकता है।
SIT गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी ने चारों प्रखंड पदाधिकारियों के साथ आपात बैठक की है।
- पूरे मामले की तकनीकी जांच के लिए एसआईटी बना दी गई है।
- अब यह पता लगाया जा रहा है कि ये प्रमाण पत्र किस IP Address से बने और किसका डिजिटल सिग्नेचर इस्तेमाल हुआ।
- सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों को रद्द करने और इस रैकेट में शामिल कंप्यूटर ऑपरेटरों, दलालों और साइबर कैफे संचालकों पर FIR की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में तीन अन्य पंचायतों के नाम भी सामने आ सकते हैं, जिससे फर्जी प्रमाण पत्रों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
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