झारखंड मुक्ति मोर्चा ने केंद्र की भाजपा सरकार पर देश की जनता को आर्थिक संकट और महंगाई के जाल में फंसाने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी ने एक प्रेस बयान जारी कर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, गिरती अर्थव्यवस्था और गरीबों के राशन कार्ड रद्द किए जाने के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
बाजार नहीं, चुनाव तय करते हैं तेल के दाम JMM ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बयानों को वास्तविकता से दूर और भ्रमित करने वाला बताया। पार्टी का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर नहीं, बल्कि भाजपा की “चुनावी लाभ-हानि” की नीति से तय होती हैं। 2022 में कच्चे तेल के दाम ऊंचे होने के बावजूद चुनावों के कारण कीमतें स्थिर रखी गईं, लेकिन दाम घटने पर जनता को राहत नहीं दी गई। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले ₹2 की कटौती इसी चुनावी राजनीति का प्रमाण है।
₹38.89 लाख करोड़ की वसूली और सरकारी मुनाफा प्रेस बयान में कहा गया कि 2014 से अब तक केंद्र सरकार ने तेल पर टैक्स के जरिए लगभग ₹38.89 लाख करोड़ वसूले हैं। एक तरफ सरकारी तेल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) ₹81,000 करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, वहीं दूसरी ओर “अंडर-रिकवरी” का बहाना बनाकर जनता पर बोझ डाला जा रहा है।
अर्थव्यवस्था पर अविश्वास का प्रतीक है बढ़ता सोना जेएमएम ने बढ़ती सोने की कीमतों और कमजोर होते रुपये पर भी चिंता जताई। पार्टी के अनुसार, सोने के दाम में उछाल यह दर्शाता है कि लोगों का अपनी करेंसी और देश की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कम हो रहा है। भाजपा की नीतियों ने आम आदमी की बचत और क्रय शक्ति को खत्म कर दिया है।
गरीबों का राशन छीनने की साजिश का आरोप पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल के बाद अब झारखंड में भी गरीबों, आदिवासियों और मूलवासियों के राशन कार्ड रद्द करने की साजिश रची जा रही है। SIR जैसे तकनीकी बहानों से जरूरतमंदों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
झामुमो की चेतावनी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साफ किया है कि वह गरीबों के अधिकारों पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं करेगा। पार्टी ने मांग की है कि भाजपा सरकार भ्रम की राजनीति छोड़कर महंगाई और बेरोजगारी जैसे असली मुद्दों पर जवाब दे।
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