‘प्रोजेक्ट परख’ से बदलेगी चाईबासा की सूरत: पश्चिमी सिंहभूम को शिक्षा में नंबर-1 बनाने का संकल्प, हर महीने की 12 तारीख को होगी PTM

पश्चिमी सिंहभूम में शिक्षा क्रांति: 'प्रोजेक्ट परख' से संवरेगा सरकारी स्कूलों के बच्चों का भविष्य।

Johar News Times
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झारखंड के सुदूरवर्ती और आकांक्षी जिले पश्चिमी सिंहभूम को शिक्षा के क्षेत्र में राज्य का शीर्ष जिला बनाने की कवायद तेज हो गई है। जिले की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से हाई-टेक, पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख बनाने के लिए ‘प्रोजेक्ट परख: तैयारी उड़ान की’ का आगाज़ किया गया है।

इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए टाटा कॉलेज चाईबासा के बहुउद्देशीय सभागार में एक भव्य एकदिवसीय बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जिले के आला अधिकारियों ने शिक्षकों के साथ मिलकर चाईबासा की शिक्षा क्रांति का नया खाका तैयार किया और “सशक्त सिंहभूम” की परिकल्पना को साकार करने का संकल्प लिया।

शिक्षकों की मेहनत से ही साकार होगा ‘सशक्त सिंहभूम’ का सपना: मनीष कुमार

कार्यशाला को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मनीष कुमार ने मुख्यमंत्री के विजन को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव लाने का लक्ष्य तय किया गया है।

उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा:

“आत्मविश्लेषण , निष्पक्षता और शिक्षकों की ईमानदारी भरी मेहनत से ही हमारे बच्चे देश-दुनिया में सिंहभूम का नाम रोशन करेंगे। प्रशासन शिक्षकों की हर जायज समस्या के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, बदले में शिक्षकों को बच्चों को सर्वश्रेष्ठ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देनी होगी।”

शिक्षा के स्तर को सुधारने और स्कूलों की मॉनिटरिंग के लिए जिला प्रशासन की ओर से कई महत्वपूर्ण और अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं:

  • स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की बायोमेट्रिक व नियमित उपस्थिति 100% सुनिश्चित करनी होगी। स्कूल परिसरों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना होगा।
  • अभिभावकों को बच्चों की प्रगति से जोड़ने के लिए प्रत्येक महीने की 12 तारीख को अनिवार्य रूप से अभिभावक-शिक्षक बैठक आयोजित की जाएगी।
  • सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए हर महीने की 30 तारीख को सम्मानपूर्वक विदाई दी जाएगी और उनके पेंशन मामलों का ऑन-स्पॉट त्वरित निष्पादन किया जाएगा।

शैक्षणिक मूल्यांकन के साथ-साथ पर्यावरण और सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार

प्रोजेक्ट परख सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा। बैठक में बच्चों के समग्र विकास के लिए कई अन्य योजनाओं पर भी मुहर लगी:

  1. बच्चों के शैक्षणिक मूल्यांकन के लिए हर सप्ताह और महीने नियमित टेस्ट होंगे। इसके अलावा खेल महोत्सव और शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किए जाएंगे।
  2. सभी स्कूल परिसरों को हरा-भरा और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाएगा, जिसमें सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।
  3. सरकारी स्कूलों को माध्यम बनाकर समाज में फैली कुरीतियों जैसे—बाल विवाह, घरेलू हिंसा और धूम्रपान/नशामुक्त समाज के खिलाफ छात्र-छात्राओं के जरिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में आईएएस अधिकारी उत्कर्ष कुमार, श्रुति राजलक्ष्मी, टोनी प्रेम राज टोप्पो, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण कुमार समेत जिले के तमाम माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्य, प्रधानाध्यापक और शिक्षा परियोजना से जुड़े अधिकारी व कर्मी मौजूद रहे।

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