घाटशिला और गालूडीह क्षेत्र में बुधवार को एनएच-18 पर स्थित पेट्रोल पंपों पर अचानक पेट्रोल और डीजल की किल्लत से अफरातफरी का माहौल बन गया। कई पेट्रोल पंपों पर “आउट ऑफ स्टॉक” का बोर्ड लगा दिया गया, जिससे वाहन चालकों और आम ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
एनएच-18 पर जगन्नाथपुर स्थित भारत पेट्रोलियम पंप और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पंप पर पेट्रोल-डीजल पूरी तरह समाप्त हो गया। इसी तरह गालूडीह के पेट्रोल पंप और ए-वन पेट्रोल पंप पर भी ईंधन उपलब्ध नहीं रहा, जिसके कारण वाहन चालकों को बिना ईंधन लिए ही आगे बढ़ने को मजबूर होना पड़ा।
जगन्नाथपुर के बाद एनएच-18 पर अगला पेट्रोल पंप करीब 15 किलोमीटर दूर धालभूमगढ़ में स्थित है। ऐसे में बाइक सवार लोग तो वापस लौट गए, लेकिन लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालक आगे ईंधन मिलने की उम्मीद में यात्रा जारी रखते रहे।
कुछ दिन पहले भी घाटशिला के जयराम पेट्रोल पंप और कॉलेज रोड स्थित पेट्रोल पंप पर तेल खत्म होने के कारण बिक्री बंद करनी पड़ी थी, हालांकि अगले ही दिन आपूर्ति बहाल कर दी गई थी। इसी तरह सोमवार को जादूगोड़ा के पेट्रोल पंपों पर भी अस्थायी रूप से बिक्री रोकनी पड़ी थी, लेकिन मंगलवार सुबह आपूर्ति शुरू होते ही स्थिति सामान्य हो गई थी।
पंप संचालकों की चिंता : सप्लाई में 25% की कमी
पंप संचालकों के अनुसार, पिछले अप्रैल की तुलना में करीब 25 प्रतिशत कम तेल की सप्लाई मिल रही है। साथ ही ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अब पहले जैसी क्रेडिट सुविधा नहीं दे रहीं। बताया गया कि सुबह टैंकर आने के बाद यदि शाम तक भुगतान नहीं होता है, तो आगे की सप्लाई रोकने की स्थिति बन जाती है, जिससे बार-बार “आउट ऑफ स्टॉक” की समस्या उत्पन्न हो रही है।
पैनिक बाइंग से और बिगड़ी स्थिति
बार-बार आउट ऑफ स्टॉक की स्थिति देखकर लोग जरूरत से अधिक पेट्रोल-डीजल खरीद रहे हैं। इससे डिमांड और सप्लाई का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।
ठेका कंपनियों का भारी डीजल भंडारण भी कारण
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि ठेका कंपनियां अपनी पोकलेन और जेसीबी मशीनों के लिए पहले से ही बड़े पैमाने पर डीजल का स्टॉक कर रही हैं। इससे आम उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति कम पड़ रही है और पंपों पर बार-बार आउट ऑफ स्टॉक की स्थिति बन रही है। एनएच-18 और गालूडीह क्षेत्र के पंपों पर लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है या बिना ईंधन के लौटना पड़ रहा है। जानकारों के अनुसार, निर्माण कार्यों में भारी मशीनों के संचालन के लिए रोजाना बड़ी मात्रा में डीजल की जरूरत होती है। ठेका कंपनियां काम प्रभावित न हो, इसके लिए पहले से ईंधन का भंडारण कर लेती हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर सप्लाई पर असर पड़ रहा है।
अफवाहें और आशंका भी बनी वजह
कुछ लोग इस स्थिति को अंतरराष्ट्रीय घटनाओं जैसे होर्मुज स्ट्रेट से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग कीमत बढ़ने की आशंका के कारण ईंधन जमा कर रहे हैं। हालांकि अब तक किसी बड़े स्तर की गंभीर कमी की पुष्टि नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार अधिकतर स्थानों पर एक-दो दिन में आपूर्ति बहाल हो जा रही है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन बार-बार होने वाली सप्लाई बाधा ने लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।











