पूर्वी सिंहभूम में यूरेनियम का नया भंडार मिला, केंद्र ने दी खोज कार्य की मंजूरी

पूर्वी सिंहभूम में यूरेनियम का नया भंडार मिला, केंद्र ने दी खोज कार्य की मंजूरी

Johar News Times
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झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के खड़ाडुंगरी-सुंगरी ब्लॉक में यूरेनियम का नया भंडार मिलने से देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने क्षेत्र में यूरेनियम की संभावनाओं की जांच (प्रॉस्पेक्टिंग) के लिए प्रथम चरण की मंजूरी प्रदान कर दी है।

स्वीकृत क्षेत्र का एक हिस्सा वन भूमि और शेष कृषि भूमि में आता है। मंजूरी वन संरक्षण एवं विकास अधिनियम, 1980 के तहत दी गई है। खोज कार्य की जिम्मेदारी जमशेदपुर के खासमहल स्थित Atomic Minerals Directorate for Exploration and Research (AMD) को सौंपी गई है। AMD के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भट्टाचार्य ने इसके लिए आवेदन किया था।

10 वर्षों की जरूरत पूरी करने की क्षमता

अधिकारियों के अनुसार, नए भंडार में इतना यूरेनियम होने की संभावना है कि इससे देश की घरेलू जरूरतों को अगले एक दशक तक पूरा करने में मदद मिल सकती है। पूर्वी सिंहभूम पहले से ही यूरेनियम उत्पादन का प्रमुख केंद्र रहा है। Uranium Corporation of India Limited द्वारा जादूगोड़ा, मुसाबनी और पोटका क्षेत्रों में खनन कार्य संचालित किया जा रहा है। इससे पहले बनाडुंगरी-सिमरीडुंगरी क्षेत्र में लगभग 11,000 टन तथा राजदा क्षेत्र में करीब 5,000 टन यूरेनियम भंडार मिलने की जानकारी सामने आ चुकी है।

30 बोरहोल की ड्रिलिंग होगी

खोज कार्य के तहत कुल 30 बोरहोल ड्रिल किए जाएंगे, जिनमें से 25 वन क्षेत्र में प्रस्तावित हैं। ड्रिलिंग स्थलों का चयन आधुनिक सैटेलाइट तकनीक की मदद से किया गया है। केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कई शर्तें भी लगाई हैं। इनमें राज्य सरकार के सहयोग से 2,750 बड़े पेड़ लगाने की अनिवार्यता शामिल है, ताकि वन क्षेत्र और स्थानीय पारिस्थितिकी पर असर न पड़े।

रेडिएशन का खतरा नहीं : विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रस्तावित वैज्ञानिक सर्वेक्षण प्रक्रिया से स्थानीय आबादी या पर्यावरण को किसी प्रकार का रेडिएशन खतरा नहीं होगा। खोज के दौरान लगभग 3 सेंटीमीटर व्यास वाले विशेष पाइपों से कोर सैंपल निकाले जाएंगे, जिन्हें परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा। जांच पूरी होने के बाद संबंधित क्षेत्र को सुरक्षित तरीके से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। यह खोज भारत की परमाणु ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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