सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर में सोमवार को ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस’ उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित विशेष सेमिनार में नीति आयोग के सदस्य और देश के जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार सारस्वत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य तकनीक के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना रहा।
1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण के माध्यम से भारत ने अपनी जो तकनीकी धमक पूरी दुनिया में दिखाई थी, उसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए एनआईटी के डीएलजेएचसी-212 सभागार में शिक्षाविदों और छात्रों का जमावड़ा लगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रोफेसर गौतम सूत्रधार ने की।
मुख्य अतिथि डॉ. विजय कुमार सारस्वत ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान दौर में तकनीक केवल आविष्कारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका लाभ समावेशी विकास के रूप में समाज के हर वर्ग को मिलना चाहिए। उन्होंने युवाओं को शोध और अनुसंधान के प्रति प्रेरित करते हुए जिम्मेदार नवाचार पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सोना देवी विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने भी शिक्षा और तकनीक के समन्वय पर अपने विचार साझा किए।
संस्थान के आउटरीच एक्टिविटीज विभाग द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने चर्चा की कि कैसे छोटे-छोटे तकनीकी बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को मजबूत कर सकते हैं।
“एनआईटी जमशेदपुर का लक्ष्य है कि हमारे छात्र ऐसी तकनीक विकसित करें जो न केवल आधुनिक हो, बल्कि सामाजिक समस्याओं का समाधान भी दे सके।”
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