चांडिल में 4 हजार से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का आरोप, रांची-बिहार और बंगाल के लोगों के नाम पर बने दस्तावेज

चांडिल में 4 हजार से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का आरोप, रांची-बिहार और बंगाल के लोगों के नाम पर बने दस्तावेज

Johar News Times
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तीन पंचायतों से बड़े पैमाने पर प्रमाण पत्र जारी होने का मामला; जांच की धीमी रफ्तार पर उठे सवाल, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

जमशेदपुर/चांडिल। सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड में चार हजार से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि रसुनिया, रुचाप और चौका पंचायतों से कंप्यूटर जनरेटेड सरकारी जन्म प्रमाण पत्र बड़ी संख्या में जारी किए गए। इनमें सबसे अधिक प्रमाण पत्र रांची जिले के लोगों के नाम पर बनाए गए, जबकि बिहार और पश्चिम बंगाल के कई निवासियों को भी झारखंड का जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने की बात सामने आई है। मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन जांच की धीमी प्रगति को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि समय पर कार्रवाई नहीं होने से पूरे मामले में लीपापोती की आशंका बढ़ रही है।

ऐसे हुआ कथित फर्जीवाड़े का खुलासा
मामले का खुलासा मई के पहले सप्ताह में हुआ, जब विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के संस्थापक राकेश रंजन महतो ने रुचाप पंचायत में पश्चिम बंगाल के बाघुड़िया निवासी एक व्यक्ति को पकड़ा। आरोप है कि वह प्रखंड के कंप्यूटर ऑपरेटर राकेश गुप्ता को पैसे देकर अपना जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर लौट रहा था। शिकायत मिलने के बाद अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) ने जांच के आदेश दिए। पंचायत सचिवों और कंप्यूटर ऑपरेटर राकेश गुप्ता से स्पष्टीकरण भी मांगा गया। हालांकि आरोप है कि जांच शुरू होने के बाद से ही राकेश गुप्ता क्षेत्र से गायब है, जिससे जांच प्रभावित हुई है।

सरकारी प्रक्रिया पर खड़े हुए गंभीर सवाल
नियमों के अनुसार एक वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति का जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के लिए ऑनलाइन आवेदन, पंचायत स्तर पर सत्यापन, प्रखंड कार्यालय की जांच और अनुमंडल कार्यालय की स्वीकृति आवश्यक होती है। ऐसे में हजारों प्रमाण पत्र जारी होने की बात सामने आने से पूरी प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
झारखंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया और बोकारो में भी ऐसे रैकेट का खुलासा हो चुका है। जांच में पाया गया था कि बाहरी राज्यों के लोगों को झारखंड का निवासी दिखाने के लिए हजारों फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए गए थे। चाकुलिया मामले में पंचायत सचिव और प्रज्ञा केंद्र संचालकों समेत पांच लोगों को जेल भी भेजा गया था। इसके बावजूद चांडिल में सामने आए नए मामले ने प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी तंत्र पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के माध्यम से बाहरी लोगों को सरकारी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि पहचान और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला भी है। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि जांच जारी है और रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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