राजधानी के प्रतिष्ठित सेंटेविटा अस्पताल से वित्तीय धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। अस्पताल के पूर्व आईटी प्रमुख मोहम्मद राजुद्दीन पर पद का दुरुपयोग कर 76.13 लाख रुपये से अधिक के गबन और जालसाजी का आरोप लगा है। अस्पताल के निदेशक अमित कुमार साहू ने इस संबंध में पुलिस को लिखित शिकायत देकर मामला दर्ज करने और विस्तृत जांच की मांग की है।
📌 ‘कंप्यूटर गैलेक्सी’ के नाम पर खेल: खुद की फर्म को पहुंचाया फायदा
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, मोहम्मद राजुद्दीन के पास आईटी उपकरणों की खरीद, सर्वर मेंटेनेंस और क्लाउड स्टोरेज प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय अधिकार थे। आरोप है कि उन्होंने प्रबंधन को अंधेरे में रखकर “कंप्यूटर गैलेक्सी” नाम से अपनी एक निजी फर्म शुरू की।
इसके बाद, अस्पताल को आईटी सेवाएं और उपकरण सप्लाई करने के लिए उन्होंने अन्य कंपनियों के नाम पर फर्जी और मनगढ़ंत कोटेशन तैयार किए। इन नकली दस्तावेजों के जरिए वे अपनी कंपनी ‘कंप्यूटर गैलेक्सी’ के रेट को सबसे कम दिखाते थे, ताकि ठेका उन्हीं की फर्म को मिले।
दो वित्तीय वर्षों में ऐसे हुआ लाखों का गबन
शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने सुनियोजित तरीके से दो वित्तीय वर्षों में अस्पताल को लाखों का चूना लगाया:
- वित्तीय वर्ष 2025-26: क्लाउड स्टोरेज, सर्वर मेंटेनेंस और अन्य आईटी सेवाओं के नाम पर ₹51.27 लाख से अधिक का भुगतान कराया गया।
- वित्तीय वर्ष 2024-25: इसी तरह के फर्जी मदों में ₹24.11 लाख और ₹75 हजार से अधिक की राशि हड़पी गई।
- कुल गबन राशि: लगभग ₹76,13,000 ।
जितनी जरूरत नहीं, उससे दोगुने का बनाया बिल
अस्पताल निदेशक ने अपनी शिकायत में उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह से फर्जी बिलिंग की जाती थी:
“आरोपी द्वारा अस्पताल में 500 GB क्लाउड स्टोरेज का बिल सबमिट कर भुगतान लिया गया, जबकि वास्तव में अस्पताल सिर्फ 250 GB क्लाउड स्पेस का ही उपयोग कर रहा था। इसके अलावा अस्पताल को झांसा देकर ऐसी कई अनचाही आईटी सेवाएं और अतिरिक्त क्लाउड स्पेस खरीदने के लिए मजबूर किया गया, जिनकी अस्पताल को कोई जरूरत ही नहीं थी।”
पुलिस जांच के बाद होगी कानूनी कार्रवाई
अस्पताल प्रबंधन का स्पष्ट आरोप है कि पूर्व आईटी प्रमुख ने आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी के जरिए अस्पताल को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया और खुद अवैध मुनाफा कमाया। पुलिस को दी गई शिकायत में आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
फिलहाल, पुलिस मामले की सत्यता और तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। पूरी सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।
