झारखंड हाई कोर्ट ने गुमला जिले के बैजनाथ जालान कॉलेज के सेवानिवृत्त तृतीय वर्गीय कर्मचारी दिनेश साहू को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिलने के मामले में उच्च शिक्षा निदेशक की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों को जब पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ दिया जा चुका है, तो दिनेश साहू को इससे वंचित रखना उचित नहीं है। अदालत में उपस्थित उच्च शिक्षा निदेशक सुधीर बाड़ा को निर्देश दिया गया कि वे आठ सप्ताह के भीतर मामले की पुनः समीक्षा कर प्रार्थी को पंचम और छठा वेतनमान का लाभ देते हुए पेंशन व अन्य सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान सुनिश्चित करें।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले सप्ताह में तय करते हुए अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि दिनेश साहू का समायोजन और नियमितीकरण भी उसी पत्र के आधार पर हुआ था, जिसके आधार पर उपेंद्र प्रसाद और अन्य कर्मचारियों को लाभ दिया गया था। इसलिए उन्हें भी समान लाभ मिलना चाहिए।
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने बताया कि दिनेश साहू वर्ष 2022 में कॉलेज से सेवानिवृत्त हुए थे और फिलहाल उन्हें प्रोविजनल रूप से पंचम वेतनमान का लाभ मिल रहा है। उनका सेवा समायोजन और नियमितीकरण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में वर्ष 2005 और 2007 में हुआ था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार ने दिनेश साहू के मामले में एकल पीठ के आदेश को कभी चुनौती नहीं दी, जबकि उपेंद्र प्रसाद मामले में अपील समय सीमा के भीतर दाखिल नहीं होने के कारण खारिज हुई थी। ऐसे में इस आधार पर प्रार्थी के मामले को लंबित रखना अनुचित है।
गौरतलब है कि हाई कोर्ट की एकल पीठ ने वर्ष 2024 में ही दिनेश साहू को पंचम और छठा वेतनमान का लाभ देते हुए पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने का आदेश दिया था। आदेश का पालन नहीं होने पर उन्होंने अवमानना याचिका दायर की थी।










