झारखंड सरकार ने रांची रेल मंडल की महत्वाकांक्षी लोधमा–पिस्का लिंक रेल लाइन परियोजना को बड़ी राहत देते हुए रेलवे को 11.635 एकड़ भूमि हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है। राज्य कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद लंबे समय से धीमी चल रही परियोजना को अब गति मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट ने खूंटी जिले के कर्रा अंचल स्थित मौजा काटमकुकू और कुलहुटू की गैरमजरूआ खास एवं आम भूमि को दक्षिण पूर्व रेलवे को स्थायी रूप से हस्तांतरित करने की स्वीकृति दी है। इसके एवज में रेलवे की ओर से 17 करोड़ 81 लाख 58 हजार 938 रुपये का भुगतान किया जाएगा। करीब 17.2 किलोमीटर लंबी यह लिंक लाइन लोधमा और पिस्का स्टेशन के बीच बनाई जा रही है। परियोजना पूरी होने के बाद हटिया और रांची स्टेशन को बाइपास करते हुए ट्रेनों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इससे राउरकेला–टोरी रेल रूट की कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत होगी।
रांची और हटिया स्टेशन पर घटेगा दबाव
फिलहाल कई यात्री और मालगाड़ियां रांची एवं हटिया स्टेशन होकर गुजरती हैं, जिससे दोनों स्टेशनों पर परिचालन दबाव बना रहता है। नई लिंक लाइन शुरू होने के बाद कई ट्रेनों को सीधे इस रूट से चलाया जा सकेगा, जिससे रांची और हटिया स्टेशन पर अतिरिक्त स्लॉट उपलब्ध होंगे। रेलवे का मानना है कि इससे उत्तर और दक्षिण भारत की ओर रेल परिचालन अधिक सुगम होगा। ट्रेनों की लेटलतीफी में कमी आएगी और यात्रियों के समय की भी बचत होगी। अनुमान है कि कई ट्रेनों के परिचालन समय में करीब एक घंटे तक की कमी आ सकती है।
पिस्का स्टेशन को बनाया जाएगा बड़ा रेल हब
पिस्का स्टेशन को भविष्य में बड़े रेलवे हब के रूप में विकसित करने की योजना है। इसे दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। रेलवे का मानना है कि इससे राजधानी रांची के रेल नेटवर्क को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। रांची रेल मंडल ने परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। रेलवे की ओर से प्रारंभिक निर्माण और भूमि संबंधी कई प्रक्रियाएं पहले ही पूरी की जा चुकी हैं। रांची रेल मंडल के डीआरएम करुणा निधि सिंह ने कहा कि लोधमा–पिस्का लिंक लाइन परियोजना रांची रेल नेटवर्क के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके पूरा होने से ट्रेनों के संचालन समय में कमी आएगी और रांची–हटिया सेक्शन पर दबाव भी कम होगा।
