काफी लोगों को ऑफिस जाना और अपना काम समय पर निपटाना पसंद होता है। वे नए जोश के साथ सोमवार का इंतज़ार करते हैं। लेकिन दूसरी ओर, एक बड़ी आबादी ऐसी भी है जिन्हें वीकेंड खत्म होते ही घबराहट होने लगती है। अगर रविवार की शाम ढलते ही आपके मन में सोमवार की मीटिंग्स, वर्क प्रेशर और डेडलाइन को लेकर बेचैनी बढ़ने लगती है, तो आप ‘संडे स्केयरीज’ (Sunday Scaries) का सामना कर रहे हैं।
क्या है ‘संडे स्केयरीज’?
यह कोई क्लिनिकल बीमारी नहीं, बल्कि एक मानसिक स्थिति है जिसे ‘एंटीसिपेटरी एंजायटी’ (Anticipatory Anxiety) कहा जाता है। इसमें व्यक्ति आने वाले कल (सोमवार) की चुनौतियों को लेकर पहले से ही तनाव में आ जाता है। जैसे-जैसे रविवार खत्म होता है, दिमाग ऑफिस के बोझ को महसूस करने लगता है, जिससे रात की नींद भी उड़ सकती है।
क्यों होती है यह समस्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई मुख्य कारण हो सकते हैं:
- वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी: जब काम का दबाव निजी जीवन पर हावी होने लगे।
- जॉब इनसिक्योरिटी: नौकरी को लेकर असुरक्षा का भाव।
- टारगेट का प्रेशर: सोमवार की बड़ी मीटिंग्स या पेंडिंग कामों का बोझ।
- बदलाव का डर: रिलैक्सिंग वीकेंड से अचानक स्ट्रिक्ट रूटीन में जाने का मानसिक दबाव।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर आपको रविवार को ये लक्षण महसूस होते हैं, तो सावधान हो जाएं:
- शाम होते ही अचानक उदासी या चिड़चिड़ापन महसूस होना।
- पेट में भारीपन या पाचन से जुड़ी समस्या।
- सोमवार के बारे में सोचकर दिल की धड़कन तेज होना।
- पूरी रात करवटें बदलना और ठीक से नींद न आना।
कैसे पाएं इस मेंटल स्ट्रेस से राहत?
संडे स्केयरीज को मात देने के लिए आप ये आसान उपाय अपना सकते हैं:
- तैयारी पहले ही कर लें: सोमवार की ‘टू-डू लिस्ट’ और अपने कपड़े शनिवार या रविवार सुबह ही तैयार कर लें। इससे आखिरी समय की अफरा-तफरी नहीं होगी।
- रविवार को ‘वर्क डे’ न बनाएं: संडे का समय सिर्फ खुद के लिए, अपनी हॉबी और परिवार के लिए रखें। ऑफिस के ईमेल चेक करने से बचें।
- डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बना लें।
- माइंडफुलनेस अपनाएं: रविवार की शाम हल्का संगीत सुनें, वॉक पर जाएं या योग और ध्यान का सहारा लें।
अगर यह घबराहट आपके दैनिक जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, तो किसी एक्सपर्ट या काउंसलर से सलाह लेना ही बेहतर है।








