अनपढ़ आदिवासी महिला को बनाया मोहरा, रिम्स की करोड़ों की जमीन बेचने का सनसनीखेज खुलासा

अनपढ़ आदिवासी महिला को बनाया मोहरा, रिम्स की करोड़ों की जमीन बेचने का सनसनीखेज खुलासा

Johar News Times
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एसीबी जांच में भू-माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत उजागर, फर्जी दस्तावेजों से हड़पी गई सरकारी जमीन

रांची : रांची स्थित राजेन्द्र इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) की अधिग्रहित जमीन की बिक्री मामले में एसीबी जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि भू-माफियाओं ने एक अनपढ़ आदिवासी महिला को मोहरा बनाकर रिम्स की 60 डिसमिल जमीन बेच दी।

एसीबी के अनुसार वर्ष 2015 में जमीन के रिकॉर्ड ऑनलाइन करने की प्रक्रिया के दौरान माफियाओं ने महिला के नाम को रजिस्टर-2 में दर्ज कराया। जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन टाउन सीओ ने अपने पद का दुरुपयोग कर जमीन माफियाओं को फायदा पहुंचाया।

फर्जी वंशावली और पावर ऑफ अटॉर्नी का खेल

दस्तावेजों के मुताबिक मौजा मोरहाबादी स्थित खाता नंबर 107 और प्लॉट नंबर 1963/1693 की कुल 93 डिसमिल जमीन वर्ष 1968-69 में सरकार ने रिम्स के लिए अधिग्रहित की थी। इसके बावजूद भू-माफियाओं ने जमीन पर कब्जे की साजिश रची। जांच में सामने आया कि राजेश झा, मनोज बड़ाईक, चैतन कुमार, सोनू शरद और प्रमोद महतो समेत अन्य लोगों ने महिला को झांसा देकर रजिस्ट्री ऑफिस में अंगूठा लगवाया और बाद में कथित रिश्तेदार के नाम पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर ली। महिला ने एसएआर कोर्ट में खुद को आदिवासी समुदाय से जुड़ा बताया था, लेकिन जमीन बिक्री के दौरान कागजों में उसे गैर-आदिवासी दिखाया गया, ताकि खरीद-बिक्री में कानूनी बाधा न आए।

करोड़ों की जमीन, महिला को मिले सिर्फ कुछ हजार
एसीबी जांच और गवाहों के बयानों से पता चला कि जमीन घोटाले का मुख्य सूत्रधार राजेश झा और उसके सहयोगी थे। आरोपी की पत्नी मुन्नी कुमारी ने बयान में कहा कि जमीन के सौदे की जानकारी उन्हें नहीं थी और पूरा खेल उनके पति ने रचा था। जिस महिला सोनमाईत देवी के नाम पर करोड़ों की जमीन बेची गई, उसे माफियाओं ने केवल कुछ हजार रुपये देकर अलग कर दिया।

अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
एसीबी ने जांच में पाया कि भू-माफियाओं और सरकारी अधिकारियों ने मिलकर पूरी साजिश को अंजाम दिया। सोनमाईत देवी पहले एसएआर कोर्ट में जमीन बहाली का मुकदमा हार चुकी थी, क्योंकि वह खुद को असली वारिस साबित नहीं कर पाई थी। कोर्ट ने तब जमीन को सरकारी संरक्षण में रखने का आदेश दिया था।

इसके बावजूद अंचल कार्यालय में मिलीभगत कर रजिस्टर-2 में नाम दर्ज करा दिया गया। बाद में आरोपी राजेश झा ने अपनी पत्नी के नाम 11 डिसमिल जमीन लिखवाकर डेवलपर Lucky Converges के साथ वहां बहुमंजिला इमारत बनवाई, जिसे बाद में ध्वस्त कर दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि विरोध से बचने के लिए जमीन पर मंदिर और सरना स्थल भी चिन्हित किए गए। फिलहाल अंचल कार्यालय, नगर निगम और रेरा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी है।

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