दुनियाभर में इन दिनों हंतावायरस के मामले तेजी से सुर्खियों में हैं क्योंकि इसके अब तक सामने आए आठ मामलों में से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। यह संक्रमण जितना दुर्लभ है उतना ही जानलेवा भी माना जाता है। सबसे डराने वाली बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बिल्कुल सामान्य फ्लू जैसे होते हैं जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह साइलेंट किलर कुछ ही घंटों में मरीज को वेंटिलेटर तक पहुंचा सकता है।

हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों और उनके जैसे कृन्तकों से फैलने वाला संक्रमण है जो संक्रमित चूहों के मल, मूत्र और लार में मौजूद होता है। जब लोग लंबे समय से बंद पड़े गोदामों, स्टोर रूम या घरों की सफाई करते हैं तो धूल के साथ वायरस के कण हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों को संक्रमित करते हैं। हालांकि यह सामान्य तौर पर खांसने या हाथ मिलाने से नहीं फैलता लेकिन इसका एंडीज वायरस स्ट्रेन दुर्लभ मामलों में एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकता है।
इस बीमारी की शुरुआत बेहद सामान्य होती है जिसे लोग अक्सर मौसम का बदलाव या फूड पॉइजनिंग समझ लेते हैं। मरीज को तेज बुखार, थकान, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना और उल्टी जैसी परेशानियां होती हैं। संक्रमण के कुछ दिनों बाद इसका असली खतरनाक रूप सामने आता है जिसे हंतावायरस फुफ्फुसीय सिंड्रोम यानी HPS कहा जाता है। इसमें सांस लेने में भारी तकलीफ और सीने में जकड़न होने लगती है क्योंकि फेफड़ों के अंदर तरल पदार्थ भरने लगता है। ऑक्सीजन लेवल तेजी से गिरता है और दिल की धड़कन बढ़ जाती है। सीडीसी के अनुसार गंभीर मामलों में इस बीमारी की मृत्यु दर 35 से 40 प्रतिशत तक हो सकती है।

अमृता अस्पताल फरीदाबाद के सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बजाद के अनुसार लोग अक्सर इसे डेंगू, स्वाइन फ्लू या कोविड समझकर घर पर इलाज करते रहते हैं लेकिन हंतावायरस में फेफड़े और ब्लड वेसल्स में गंभीर सूजन आ जाती है जिससे स्थिति तेजी से बिगड़ती है। चूंकि इसका कोई विशिष्ट इलाज व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है। डॉक्टरों की सलाह है कि घर और किचन में चूहों को न पनपने दें और बंद कमरों या कबाड़ की सफाई करते समय हमेशा मास्क व दस्ताने पहनें। सफाई के दौरान धूल उड़ाने के बजाय गीले पोंछे या कीटाणुनाशक का उपयोग करना और कमरों में वेंटिलेशन की सही व्यवस्था रखना संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।









