सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां प्रखंड स्थित टुनियाबाड़ी (बाबूसाई टोला) में भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच पेयजल संकट गहरा गया है। सरकारी दावों में जलापूर्ति व्यवस्था सामान्य बताई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। गांव के लोग आज भी चुआं और पुराने कुओं के सहारे अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
जल जीवन मिशन के पोर्टल के अनुसार टुनियाबाड़ी में कुल 140 परिवारों में से 95 घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाए जाने का दावा किया गया है, जबकि 45 घरों में कनेक्शन बाकी बताया गया है। करीब 700 की आबादी वाले इस गांव में 63 अनुसूचित जाति, 102 अनुसूचित जनजाति और 535 सामान्य वर्ग के लोग निवास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पोर्टल पर दिखाए जा रहे आंकड़े धरातल की स्थिति से मेल नहीं खाते।
गांव में पूर्व में लगाए गए सभी 10 सरकारी चापाकल खराब पड़े हैं। इसके साथ ही दोनों सोलर संचालित मिनी जल मीनार भी लंबे समय से बंद हैं। गर्मी बढ़ने के साथ पानी की मांग बढ़ गई है, लेकिन जल स्रोत ठप होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। हर सुबह महिलाओं को बाल्टी और डिग्ची लेकर नदी किनारे बने चुआं और पुराने कुओं से पानी भरकर लाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों से खराब चापाकलों एवं जलापूर्ति योजनाओं की मरम्मत की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। गांव की महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने खराब पड़े जल मीनारों और चापाकलों को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। इस संबंध में श्रीनिवास राय, रमाकांत राय, धृवशंकर राय, रंजीत राय, गणेश सिंहदेव, राघो गुंदुवा, लालबाबू स्वांसी, बासंती नायक, मानी नायक, मोहनी गोप, सेफाली बेहरा, निर्मला सोय, पायल उमंग, शिवांदी बेहरा, रुपाली बेहरा और सत्यनारायण राय समेत कई ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि वर्ष 2005-06 में शुरू हुई खरसावां जलापूर्ति योजना के तहत गांव के करीब चार दर्जन घरों तक पाइपलाइन से पानी पहुंचता था। कुछ वर्षों तक व्यवस्था ठीक रही, लेकिन बाद में पाइपलाइन जाम हो गई। नियमित साफ-सफाई और मेंटेनेंस के अभाव में पिछले लगभग 10 वर्षों से घरों तक पानी पहुंचना बंद है, जिससे गांव में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है।
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