टाटा स्टील ग्रेड रिवीजन से एनएस ग्रेड कर्मियों में असंतोष, यूनियन के सामने नई चुनौती

टाटा स्टील के बहुप्रतीक्षित ग्रेड रिवीजन समझौते को जहां एक ओर ऐतिहासिक उपलब्धि बताया जा रहा है

Johar News Times
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टाटा स्टील के बहुप्रतीक्षित ग्रेड रिवीजन समझौते को जहां एक ओर ऐतिहासिक उपलब्धि बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर समझौते के बाद कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग में नाराजगी और असंतोष उभरकर सामने आया है। खासकर एनएस ग्रेड के कर्मचारी खुद को इस समझौते में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। कम वेतन वृद्धि, अपेक्षा से कम लाभ और सीरियल भुगतान में देरी को लेकर कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। समझौते की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद यूनियन कार्यालय में उठे सवालों ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।

बुधवार को सात वर्षों के लंबे इंतजार के बाद टाटा स्टील में वेज रिवीजन समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इसके साथ ही कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि और विभिन्न भत्तों में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हुआ, लेकिन समझौते के तुरंत बाद ही यूनियन कार्यालय में कई सवाल उठने लगे। समझौते के बाद आयोजित कमेटी बैठक में कई सदस्यों ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई। प्रतिनिधियों ने यूनियन नेतृत्व से पूछा कि इतने महत्वपूर्ण समझौते की पूरी जानकारी पहले कर्मचारियों और कमेटी सदस्यों के साथ साझा क्यों नहीं की गई। उनका कहना था कि कर्मचारियों के भविष्य और आर्थिक हितों से जुड़े फैसलों में अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए थी।

सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान माहौल काफी गर्म रहा। कई सदस्यों ने समझौते के विभिन्न प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों के बीच जो उम्मीदें बनी थीं, यह समझौता उन पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता दिख रहा है। कुछ प्रतिनिधियों ने यूनियन अध्यक्ष से सीधे जवाब मांगते हुए विस्तृत जानकारी देने की मांग की। बैठक में सबसे अधिक चर्चा एनएस ग्रेड कर्मचारियों को लेकर हुई। कर्मचारियों का कहना है कि ग्रेड रिवीजन में उन्हें अपेक्षा से काफी कम इंक्रीमेंट मिला है। उनका मानना है कि अन्य ग्रेड के कर्मचारियों की तुलना में एनएस ग्रेड को समान अनुपात में लाभ नहीं मिला, जिससे इस वर्ग में निराशा का माहौल है।

एनएस ग्रेड कर्मचारियों ने सीरियल भुगतान में हो रही देरी को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि लंबे समय से सीरियल का भुगतान लंबित है। वेज रिवीजन के बाद उम्मीद थी कि इस प्रक्रिया में तेजी आएगी, लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होने से कर्मचारियों की बेचैनी बढ़ गई है। बैठक में कई प्रतिनिधियों ने कहा कि वेज रिवीजन केवल प्रतिशत और आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ प्रत्येक कर्मचारी तक पहुंचना चाहिए। यदि किसी वर्ग को यह महसूस हो कि उसके साथ न्याय नहीं हुआ है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि यूनियन नेतृत्व ने कर्मचारियों की आशंकाओं पर सफाई देते हुए कहा कि समझौता पूरी तरह कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखकर किया गया है। नेतृत्व का दावा है कि कई दौर की कठिन वार्ता के बाद यह समझौता संभव हो पाया है। यूनियन पदाधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि समझौते के प्रत्येक बिंदु की जानकारी कर्मचारियों तक पहुंचाई जाएगी और जिन मुद्दों को लेकर भ्रम या असंतोष है, उन पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। फिलहाल वेज रिवीजन के जश्न के साथ कर्मचारियों की नाराजगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। विशेष रूप से एनएस ग्रेड कर्मचारियों का असंतोष यूनियन नेतृत्व के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान किस तरह किया जाता है और आने वाले दिनों में यह असंतोष शांत होता है या और बढ़ता है।

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