चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से थैलेसीमिया पीड़ित पांच बच्चों को संक्रमित खून चढ़ाए जाने के बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले में आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने मामले के आरोपी पूर्व सिविल सर्जन डॉ० सुशांतो माझी और ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ० दिनेश सवैयां की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
अदालत से झटका लगने के बाद अब दोनों ही डॉक्टरों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
पूछताछ के बाद सता रहा था गिरफ्तारी का डर
पुलिस द्वारा मामले के अनुसंधान के क्रम में पिछले दिनों पूर्व सिविल सर्जन और ब्लड बैंक प्रभारी से गहन पूछताछ की गई थी। पुलिसिया पूछताछ के बाद दोनों को अपनी गिरफ्तारी की पूरी आशंका थी, जिससे बचने के लिए उन्होंने कोर्ट में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कल इस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
अक्टूबर 2025 में हुआ था मामले का भंडाफोड़, हाईकोर्ट के आदेश पर हुई FIR
यह दिल दहला देने वाला मामला अक्टूबर 2025 में सामने आया था, जब थैलेसीमिया पीड़ित मासूम बच्चों को संक्रमित खून दिए जाने की पुष्टि हुई थी। इस अमानवीय लापरवाही के खिलाफ माननीय हाईकोर्ट के कड़े निर्देश के बाद, एक पीड़ित बच्चे की मां के लिखित आवेदन पर चाईबासा सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इस मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए सदर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी:
- मामले का मुख्य आरोपी और ब्लड बैंक का पूर्व लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार लंबे समय से फरार चल रहा था, जिसे पुलिस ने हाल ही में रांची से दबोच कर जेल भेज दिया है।
- इस घिनौने कृत्य के बाद आरोपी लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार की सेवा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस लापरवाही को बेहद गंभीरता से लिया था। पूर्व सिविल सर्जन डॉ० सुशांतो माझी और ब्लड बैंक प्रभारी डॉ० दिनेश सवैयां को विभाग पहले ही निलंबित कर चुका है। अब कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद जिला पुलिस प्रशासन किसी भी वक्त दोनों डॉक्टरों को हिरासत में ले सकता है।
