पलामू जिला मुख्यालय स्थित प्रतिष्ठित गिरिवर प्लस टू उच्च विद्यालय में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। विद्यालय के एक शिक्षक पर छात्रों और उनके अभिभावकों से परीक्षा में शामिल कराने और कागजात जमा करने के नाम पर मोटी रकम वसूलने का आरोप लगा है। इस संबंध में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। पलामू के उपायुक्त (DC) दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने मामले का त्वरित संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कम हाजिरी वाले छात्रों से परीक्षा के नाम पर ₹10,000 मांगने का आरोप
शिकायत और वायरल वीडियो के अनुसार, यह गंभीर आरोप विद्यालय में कार्यरत रसायन शास्त्र (Chemistry) के स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक (PGT) संदीप जायसवाल पर लगा है। आरोप है कि जिन छात्र-छात्राओं की कक्षा में नियमित उपस्थिति (Attendance) कम थी, उन्हें मुख्य परीक्षा में शामिल कराने और एडमिट कार्ड दिलाने के एवज में प्रति छात्र 10,000 रुपये तक की अवैध मांग की जा रही थी। पीड़ित छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक द्वारा काफी लंबे समय से इस तरह का मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा था।

फॉर्म भरने और दस्तावेज जमा कराने के लिए भी तय था ‘रेट’
छात्रों ने शिक्षक पर और भी कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं:
- दस्तावेज वेरिफिकेशन: एक वर्ष के शैक्षणिक दस्तावेज जमा कराने के लिए ₹400 और दो वर्षों के लिए ₹800 तक की अवैध वसूली की जा रही थी। कुछ छात्रों के विरोध करने पर मोलभाव कर ₹500 में भी काम करने की बात सामने आई है।
- फॉर्म फिलअप: सामान्य परीक्षा फॉर्म भरने के नाम पर भी प्रत्येक विद्यार्थी से नियम विरुद्ध ₹100-100 अतिरिक्त वसूले जा रहे थे।
रिश्वत के दावे से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप: कुछ छात्रों ने यह भी सनसनीखेज दावा किया है कि आरोपी शिक्षक ने खुद उनसे बातचीत में कहा था कि पूर्व में विभागीय कारणों से रुका हुआ उनका वेतन चालू कराने के लिए उन्हें जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय को ₹20,000 की रिश्वत देनी पड़ी थी। हालांकि, इस चौंकाने वाले दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आरोपी शिक्षक ने आरोपों को नकारा, प्रभारी प्राचार्य ने भेजी रिपोर्ट
इस पूरे विवाद पर आरोपी शिक्षक संदीप जायसवाल ने अपनी सफाई पेश करते हुए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी छात्र या अभिभावक से एक भी रुपया नहीं लिया है, बल्कि कुछ लोग साजिश के तहत उनकी सामाजिक और पेशेवर छवि को खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। दूसरी ओर, विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य घनश्याम गुप्ता ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे प्रकरण की लिखित रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंप दी है।
शिक्षक के खिलाफ आरोप पत्र (Charge Sheet) तैयार: डीईओ
मामले की प्रगति की जानकारी देते हुए पलामू के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) सौरव प्रकाश ने बताया कि प्रारंभिक जांच और वायरल वीडियो के साक्ष्यों के आधार पर आरोपी शिक्षक के खिलाफ विभागीय आरोप पत्र (प्रपत्र ‘क’) तैयार किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आते ही नियमानुसार शिक्षक को निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही शुरू की जाएगी।
सरकारी स्कूलों में ऐसी मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी: उपायुक्त
उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा:
“सरकारी विद्यालयों में गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे पढ़ने आते हैं। वहां इस प्रकार की अवैध वसूली की शिकायतें बेहद चिंताजनक और अक्षम्य हैं। शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करा रहा है और दोष सिद्ध होते ही त्वरित व ऐसी कठोर कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी।”
इस प्रकरण ने पलामू में सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था और शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें प्रशासनिक और विभागीय जांच की अगली बड़ी कार्रवाई पर टिकी हैं।
