यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) की तुरामडीह माइंस के विस्थापितों की नौकरी और बुनियादी मांगों को लेकर सोमवार को आयोजित धरना-प्रदर्शन पूरी तरह से राजनीतिक रंग में रंग गया। एक ओर जहां राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने धरना स्थल पहुंचकर विस्थापितों के हक की आवाज बुलंद की और स्थानीय विधायक व यूसिल प्रबंधन को कटघरे में खड़ा किया; वहीं दूसरी ओर, धरना स्थल से कुछ ही दूरी पर पारंपरिक ग्रामसभा के बैनर तले ग्रामीणों ने अर्जुन मुंडा के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। इस हाई-वोल्टेज घटनाक्रम ने पोटका विधानसभा क्षेत्र में भाजपा (BJP) और झामुमो (JMM) के बीच राजनीतिक टकराव को एक बार फिर से हवा दे दी है।
धरने में पहुंचे अर्जुन मुंडा: बोले— विस्थापितों को शरणार्थी बना दिया गया है
तुरामडीह माइंस विस्थापित समिति के बैनर तले आयोजित इस अनिश्चितकालीन धरने को भाजपा जमशेदपुर महानगर कमेटी ने अपना पूर्ण समर्थन दिया। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, भाजपा नेत्री मीरा मुंडा सहित कई दिग्गज नेताओं ने आंदोलनकारियों के बीच पहुंचकर उनकी मांगों को जायज ठहराया।
सभा को संबोधित करते हुए अर्जुन मुंडा ने तीखा हमला बोला:
“यह बेहद गंभीर और चिंताजनक सवाल है कि अपनी कीमती जमीन देने के बाद भी आज विस्थापितों को रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। कुछ लोगों ने अपने निजी और राजनीतिक स्वार्थ के लिए मूल निवासियों को अपनी ही जमीन पर शरणार्थी बना दिया है। अगर विस्थापितों के अधिकारों का हनन हुआ, तो भाजपा चुप नहीं बैठेगी और सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ी जाएगी।”
“अर्जुन मुंडा वापस जाओ”: ग्रामीणों ने फूंका पुतला, पुलिस ने संभाली स्थिति
राजनीतिक ड्रामा तब और बढ़ गया जब धरना स्थल से कुछ दूरी पर तुरामडीह ग्रामसभा के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीण (महिलाएं और पुरुष) सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर “अर्जुन मुंडा वापस जाओ” के जोरदार नारे लगाए और उनका पुतला दहन किया। करीब एक घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के कारण पूरे इलाके में माहौल बेहद तनावपूर्ण और संवेदनशील हो गया था। हालांकि, मौके पर मुस्तैद पुलिस बल ने तत्परता दिखाते हुए प्रदर्शनकारियों को पूर्व मुख्यमंत्री के काफिले के नजदीक जाने से रोके रखा, जिससे कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
यूसिल केंद्र के अधीन, राजनीति न करे भाजपा: विधायक संजीव सरदार
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पोटका के झामुमो विधायक संजीव सरदार ने भाजपा पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वे वर्तमान में स्वास्थ्य कारणों से क्षेत्र से बाहर हैं और उन्हें इस घटनाक्रम की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है।
विधायक ने स्पष्ट किया:
- विरोध प्रदर्शन करने वाले लोग आम ग्रामीण थे, उनमें झामुमो का कोई औपचारिक कार्यकर्ता शामिल नहीं था।
- चूंकि यूसिल (UCIL) एक सार्वजनिक उपक्रम है जो सीधे केंद्र सरकार के अधीन आता है, इसलिए भाजपा नेताओं को घड़ियाली आंसू बहाने के बजाय केंद्र से विस्थापितों को न्याय और नौकरी दिलवानी चाहिए।
- यह क्षेत्र पेसा (PESA) कानून के अंतर्गत आता है, जहां ग्रामसभा सर्वोपरि है। विस्थापितों के दर्द पर किसी भी प्रकार की राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पोटका में राजनीतिक वर्चस्व की नई जंग
यद्यपि न तो धरना स्थल पर और न ही विरोध प्रदर्शन में किसी राजनीतिक दल का कोई झंडा या बैनर दिखाई दिया, लेकिन अंदरूनी तौर पर यह पूरी तरह भाजपा बनाम झामुमो का शक्ति प्रदर्शन बन गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में पोटका सीट पर मिली हार के बाद भाजपा इस क्षेत्र में दोबारा अपनी जमीन तलाशने के लिए विस्थापितों के संवेदनशील मुद्दे को धार दे रही है। ऐसे में तुरामडीह माइंस का यह विवाद आने वाले दिनों में पोटका की सियासत का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है।
