जमशेदपुर के कैप्टन मनीष ने समुद्री संकट में दिखाई बहादुरी, 40 लोगों की जान बचाकर लौटे वतन

जमशेदपुर के कैप्टन मनीष ने समुद्री संकट में दिखाई बहादुरी, 40 लोगों की जान बचाकर लौटे वतन

Johar News Times
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जमशेदपुर , लौह नगरी जमशेदपुर के मानगो निवासी कैप्टन मनीष कुमार ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संकट के बीच अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए 40 लोगों की जान बचाकर सुरक्षित वतन वापसी की है। करीब डेढ़ महीने तक ईरान के रणनीतिक जलमार्ग Strait of Hormuz में युद्ध जैसे हालातों में फंसे रहने के बाद उनके घर लौटने पर परिवार और इलाके में खुशी का माहौल है।

कैप्टन मनीष एक विशाल तेल मालवाहक जहाज के कप्तान हैं। उन्होंने बताया कि संकट की शुरुआत तब हुई जब उनका जहाज ईरान के एक बंदरगाह से पूरी क्षमता के साथ तेल लेकर निकला। बंदरगाह से लगभग 10 किलोमीटर दूर पहुंचते ही अचानक हालात बिगड़ गए और आसमान में मिसाइलों की आवाज तथा चारों ओर गिरते आग के गोले माहौल को भयावह बना रहे थे।

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इस खतरनाक स्थिति में कैप्टन मनीष ने तुरंत निर्णय लेते हुए जहाज का जीपीएस सिस्टम बंद कर दिया, ताकि उसकी लोकेशन ट्रैक न की जा सके। साथ ही सभी इंटरनेट कनेक्शन काट दिए गए और जहाज की लाइटें बंद कर उसे पूरी तरह अंधेरे में कर दिया गया। हालात को देखते हुए जहाज को सुरक्षित स्थान पर रोककर समुद्र में लंगर डाल दिया गया।

उस समय जहाज पर कुल 40 क्रू मेंबर सवार थे, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह कप्तान पर थी। उन्होंने बताया कि जहाज में भरे ज्वलनशील तेल के कारण खतरा और बढ़ गया था। यदि कोई मिसाइल पास भी गिरती, तो भीषण विस्फोट से करीब 50 किलोमीटर तक तबाही मच सकती थी।

लगभग 45 दिनों तक तनावपूर्ण माहौल में कैप्टन मनीष और उनकी टीम ने धैर्य और सतर्कता बनाए रखी। हालात सामान्य होने के बाद वे सभी क्रू मेंबर्स के साथ सुरक्षित लौटने में सफल रहे।

कैप्टन मनीष की इस बहादुरी और सूझबूझ की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। उनकी यह कहानी संकट के समय नेतृत्व, संयम और साहस की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।

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