छांव के नाम पर ‘खर्च’ का खेल! रांची में एक सराय पर 45 हजार, असल लागत 10 हजार के आसपास

छांव के नाम पर ‘खर्च’ का खेल! रांची में एक सराय पर 45 हजार, असल लागत 10 हजार के आसपास

Johar News Times
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रांची, तपती गर्मी से राहत देने के नाम पर रांची नगर निगम द्वारा शहर में बनवाई जा रही अस्थाई सराय अब विवादों में घिर गई हैं। निगम जहां एक सराय की लागत 45 हजार रुपये बता रहा है, वहीं स्थानीय कारीगरों का दावा है कि यही ढांचा महज 10 से 12 हजार रुपये में तैयार हो सकता है। ऐसे में यह योजना अब “राहत” से ज्यादा “खर्च” को लेकर चर्चा में है।

11 अप्रैल को मेयर और डिप्टी मेयर ने हिनू चौक और शहीद मैदान में दो सराय का उद्घाटन किया था। निगम के अनुसार अब तक 17 सराय बनाए जा चुके हैं, जबकि जरूरत के हिसाब से 50 से अधिक सराय बनाने की योजना है। इस कार्य का ठेका निविदा के माध्यम से आर्ट डेकोर कंपनी को दिया गया है।

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जमीन पर लागत का अलग सच
दैनिक जागरण की पड़ताल में सामने आया कि सराय निर्माण की वास्तविक लागत को लेकर बड़ा अंतर है। कारीगर संतोष सिंह के मुताबिक, “बांस, चटाई और पुआल में 5 से 6 हजार रुपये खर्च आते हैं। मजदूरी जोड़ने के बाद भी कुल लागत 10–12 हजार रुपये से ज्यादा नहीं होती।” उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के ढांचे पहले भी शहर में कई जगह बनाए गए हैं और बड़े स्तर पर निर्माण होने पर लागत और कम हो सकती है।

सिर्फ 90 दिन की राहत, फिर बेकार
इन अस्थाई सराय की उपयोगिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। बांस और पुआल से बने ये ढांचे केवल गर्मी के लगभग 90 दिनों तक ही टिक पाते हैं। जून में मानसून की शुरुआत के साथ तेज बारिश और हवा में इनके खराब होने की आशंका बनी रहती है।

शहर के इन चौराहों पर बने सराय
अब तक शहर के कई प्रमुख स्थानों पर ये अस्थाई सराय बनाए जा चुके हैं, जिनमें फिरायालाल चौक, बुटी मोड़, रातू रोड दुर्गा मंदिर, आईटीआई बस स्टैंड, धुर्वा बस स्टैंड, शहीद मैदान, बिरसा चौक, हिनू चौक, एजी मोड़, बहु बाजार, अरगोड़ा चौक, सिंह मोड़, लोवाडीह, खदगढ़ा बस स्टैंड, कांके रोड और अन्य स्थान शामिल हैं।

अब सवाल यह है कि क्या यह योजना वास्तव में जनता को राहत दे रही है या फिर खर्च के नाम पर संसाधनों की बर्बादी हो रही है।

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