सरायकेला के प्रतिष्ठित काशी साहू महाविद्यालय में दशकों से चली आ रही उड़िया भाषा की पढ़ाई को अचानक बंद किए जाने के फैसले के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया है। कॉलेज प्रशासन द्वारा स्नातक के 18 विषयों में प्रवेश के लिए जारी की गई नई सूची से उड़िया भाषा को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है, जिसके बाद से ही कॉलेज परिसर और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
दशकों पुरानी परंपरा टूटी, व्याख्याता होने के बावजूद हटा विषय
प्रदर्शनकारी छात्रों और स्थानीय शिक्षाविदों का कहना है कि:
- काशी साहू कॉलेज की स्थापना के समय से ही यहाँ उड़िया भाषा एक मुख्य विषय के रूप में पढ़ाई जाती रही है।
- वर्तमान में कॉलेज में इस विषय के लिए योग्य और स्वीकृत व्याख्याता भी तैनात हैं। इसके बावजूद वर्तमान सत्र की प्रवेश सूची से इस विषय को गायब कर दिया गया, जिससे सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
“मातृभाषा छीनना अधिकारों पर हमला, सिंहभूम में बड़ी है उड़िया आबादी”
स्थानीय उड़िया भाषी समुदाय और छात्र संगठनों ने कॉलेज प्रशासन के इस कदम को तानाशाही बताया है।
प्रदर्शनकारियों का तर्क: सरायकेला-खरसावां समेत पूरे सिंहभूम क्षेत्र में उड़िया भाषी आबादी बहुत बड़ी संख्या में है। ऐसे में स्थानीय युवाओं से उनकी मातृभाषा में उच्च शिक्षा हासिल करने का विकल्प छीनना उनके संवैधानिक और भाषाई अधिकारों पर सीधा कुठाराघात है।
छात्रों ने साफ किया कि उन्हें प्रवेश सूची में शामिल किए गए अन्य 18 विषयों से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उड़िया भाषा को तुरंत प्रभाव से सूची में वापस जोड़ा जाए।
कुलपति और शिक्षा विभाग से गुहार, नहीं तो थमेगा नहीं आंदोलन
प्रभावित छात्रों और उड़िया समुदाय ने काशी साहू कॉलेज के प्राचार्य, कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति और झारखंड उच्च शिक्षा विभाग से इस संवेदनशील मामले पर तुरंत पुनर्विचार करने की अपील की है।
छात्रों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उड़िया भाषा की पढ़ाई और नामांकन प्रक्रिया को बहाल नहीं किया गया, तो पूरे कोल्हान क्षेत्र में एक बड़ा और उग्र लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
