पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी ब्लॉक में दशकों पुराना भूमि-मुआवजा विवाद अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। ‘साउथ सूरदा फोर सॉफ्ट’ खदान के मुख्य गेट पर मंगलवार से दीपक पातर नाम के युवक ने अपने परिवार के साथ अनिश्चितकालीन नाकाबंदी शुरू कर दी है। आंदोलनकारियों का सीधा आरोप है कि उनके पूर्वजों की जमीन पर 54 साल पहले खनन कार्य शुरू किया गया था, लेकिन आज तक न तो उन्हें मुआवजा मिला और न ही न्याय।
मुख्य बातें :
- नाकाबंदी का नेतृत्व कर रहे दीपक पातर अपने परिवार के कुल 57 सदस्यों (महिला, पुरुष और बच्चों) के साथ खदान गेट पर दिन-रात डटे हुए हैं।
- दीपक पातर ने कड़े लहजे में कहा, “यह अब सिर्फ मेरे परिवार की लड़ाई नहीं है। यह उन सभी विस्थापितों की आवाज है जिनकी जमीन लेकर खदानें चल रही हैं और बदले में उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला है। अब केस-कचहरी के चक्कर नहीं काटेंगे, सीधा अधिकार चाहिए।”
- नाकाबंदी के कारण खदान से होने वाला खनिज का परिवहन पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे कंपनी को भारी नुकसान की आशंका है।
पीढ़ियां बदल गईं, पर नहीं मिला हक: पूर्वजों की जमीन, पोते का संघर्ष
दीपक पातर ने बताया कि साल 1970 के दशक में उनके दादा-परदादाओं की जमीन अधिग्रहित कर यहाँ माइनिंग शुरू की गई थी। कागजों पर मुआवजे के बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन धरातल पर परिवार को एक फूटी कौड़ी नसीब नहीं हुई। पीढ़ियां बदल गईं, बुजुर्ग दुनिया से चले गए, पर समस्या जस की तस रही। अब तीसरी पीढ़ी (पोते) ने मोर्चा संभाला है और साफ कर दिया है कि जब तक लिखित आश्वासन और पूरा मुआवजा नहीं मिलता, खदान की गाड़ियां आगे नहीं बढ़ेंगी।
कंपनी अधिकारियों की ‘कानूनी सलाह’ को ठुकराया, जन आंदोलन बनाने की तैयारी
खदान गेट जाम होने की सूचना के बाद कंपनी प्रबंधन के कुछ उच्च अधिकारी आंदोलनकारियों से बातचीत करने पहुँचे। अधिकारियों ने उन्हें दोबारा कानूनी रास्ता अपनाने की सलाह दी। इस पर दीपक पातर ने दोटूक जवाब दिया कि 54 साल से उनका परिवार कानूनी प्रक्रिया ही झेल रहा है। अब वे सीधे जिले के उपायुक्त से मिलकर ही मानेंगे।
दीपक ने दावा किया कि मुसाबनी और घाटशिला इलाके के कई अन्य ग्रामीण परिवार, जिनकी जमीनें भी इसी तरह कंपनियों द्वारा ली गई हैं, वे भी इस आंदोलन से जुड़ने के लिए तैयार हैं। ग्रामीणों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है और वे इसे एक बड़ा जन आंदोलन बनाने जा रहे हैं।
प्रशासनिक रुख का इंतजार
फिलहाल साउथ सूरदा खदान प्रबंधन और स्थानीय जिला प्रशासन की ओर से इस नाकाबंदी पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मामले को सुलझाने के लिए घाटशिला एसडीओ और मुसाबनी अंचलाधिकारी स्तर के अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है। जब तक प्रशासन या कंपनी की ओर से कोई ठोस और लिखित पहल नहीं होती, तब तक साउथ सूरदा माइंस की रफ्तार थमी रहने के आसार हैं।
