रांची विश्वविद्यालय की बीएड डिग्री में एक बड़ी त्रुटि सामने आई है। एक छात्रा का नाम हिंदी में गुलाब एक्का और अंग्रेजी में Rose Ekka छाप दिया गया। डिग्री और अंकपत्रों का काम संभाल रही निजी एजेंसी एनसीसीएफ (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) की कार्यप्रणाली पर इससे फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह पहली बार नहीं है। फरवरी में सिल्ली और रांची वीमेंस कॉलेज के 130 से अधिक छात्रों के एडमिट कार्ड में नाम गलत छपे थे। इनमें सिल्ली के 81 और रांची वीमेंस कॉलेज की 40 से ज्यादा छात्राएं शामिल थीं। छात्रों को फेल दिखाने या विषयों में शून्य अंक दर्ज करने जैसी शिकायतें भी पहले सामने आ चुकी हैं।
छात्र संगठनों ने एनसीसीएफ को ब्लैकलिस्ट करने की मांग उठाई है। अबुआ अधिकार मंच के अभिषेक शुक्ला ने कहा कि एजेंसी की लापरवाही का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है, क्योंकि त्रुटियां सुधारने के लिए उन्हें बार-बार विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
रांची विश्वविद्यालय ने दिसंबर 2022 में परीक्षा संबंधी कार्य एनसीसीएफ को सौंपा था। इससे पहले परीक्षा विभाग स्वयं यह काम करता था, जिसमें वार्षिक खर्च करीब दो करोड़ रुपये था। एजेंसी आने के बाद परीक्षा शुल्क बढ़ा और विश्वविद्यालय अब इस कार्य के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये सालाना भुगतान करता है। साथ ही छात्रों का डेटा भी निजी एजेंसी के पास है।
मोरहाबादी स्थित विश्वविद्यालय का एग्जामिनेशन डेटा प्रोसेसिंग सेल, जहां पहले रिजल्ट, मार्कशीट, माइग्रेशन और डिग्री प्रिंटिंग का काम होता था, अब लगभग निष्क्रिय पड़ा है। विश्वविद्यालय कर्मचारियों को अन्य विभागों में भेज दिया गया, जबकि एजेंसी सीनेट हॉल से अपना पूरा काम संचालित कर रही है।
