जमशेदपुर। टाटा टिनप्लेट अस्पताल में लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को सेवा से हटाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उनका मामला उपश्रमायुक्त कार्यालय में लंबित होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें काम से अलग कर दिया। इसे लेकर कर्मचारियों ने प्रबंधन पर श्रम कानूनों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
कर्मचारियों के अनुसार वे टिनप्लेट अस्पताल में डॉ. टी.सी. जॉन ट्रस्ट के माध्यम से पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत हैं। हाल ही में उन्हें सेवा समाप्ति संबंधी नोटिस दिया गया था, जिसके खिलाफ उन्होंने उपश्रमायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद 3 जून को दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई थी तथा अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की गई है।
कर्मचारियों का दावा है कि वार्ता के दौरान मामला विचाराधीन रहने तक यथास्थिति बनाए रखने की बात कही गई थी। इसके बावजूद 15 जून को उन्हें काम पर आने से रोक दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि यह एकतरफा कार्रवाई है और इससे उनके परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
प्रभावित कर्मचारियों ने मांग की है कि उन्हें तत्काल पुनः कार्य पर लिया जाए और 15 जून की कार्रवाई को वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 18 जून को होने वाली सुनवाई में संतोषजनक समाधान नहीं निकला तो वे टिनप्लेट अस्पताल अथवा TMH के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे।
मामले को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बाद इस तरह की कार्रवाई उनके साथ अन्याय है। वहीं, इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन अथवा डॉ. टी.सी. जॉन ट्रस्ट की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब सभी की नजर 18 जून को उपश्रमायुक्त कार्यालय में होने वाली सुनवाई पर टिकी है, जहां इस विवाद के समाधान की संभावना जताई जा रही है।
