रांची: सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) के नियमों में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने एमपीएलएडीएस गाइडलाइंस-2026 का प्रारूप तैयार कर राज्यों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसी क्रम में झारखंड सरकार ने सभी जिलों से राय मांगते हुए उपविकास आयुक्तों को दो दिनों के भीतर सुझाव भेजने का निर्देश दिया है। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य की ओर से केंद्र सरकार को समेकित सुझाव भेजे जाने हैं। विभाग ने बताया कि 25 मई को भी जिलों से इस संबंध में मंतव्य मांगा गया था, लेकिन अधिकांश जिलों से अब तक जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। इसके बाद दोबारा पत्र जारी कर समयबद्ध तरीके से सुझाव उपलब्ध कराने को कहा गया है।
क्या है एमपीएलएडीएस योजना?
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना की शुरुआत वर्ष 1993 में हुई थी। इसके तहत लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों की अनुशंसा करने का अधिकार प्राप्त है। केंद्र सरकार प्रत्येक सांसद को प्रतिवर्ष पांच करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराती है। इस राशि का उपयोग सड़क, पुलिया, सामुदायिक भवन, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, पेयजल सुविधा, स्वास्थ्य केंद्र, खेल मैदान, सोलर लाइट, पुस्तकालय और अन्य सार्वजनिक उपयोग की स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण में किया जाता है। योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है।
झारखंड में हर साल खर्च होते हैं करोड़ों रुपये
झारखंड में लोकसभा की 14 सीटें हैं। इस आधार पर केवल लोकसभा सांसदों को ही हर वर्ष 70 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध होती है। इसके अलावा राज्यसभा सांसदों को भी एमपीएलएडीएस के तहत फंड मिलता है, जिसका उपयोग वे विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए कर सकते हैं।
पारदर्शिता और निगरानी पर हो सकता है जोर
हालांकि केंद्र सरकार ने अभी प्रस्तावित बदलावों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि नए दिशा-निर्देशों में फंड के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाने, योजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग मजबूत करने, समय पर कार्य पूरा कराने और परिसंपत्तियों के रखरखाव को लेकर अधिक प्रभावी प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, सभी राज्यों से प्राप्त सुझावों का अध्ययन करने के बाद केंद्र सरकार एमपीएलएडीएस गाइडलाइंस-2026 को अंतिम रूप देगी। ऐसे में झारखंड समेत विभिन्न राज्यों की राय नए नियमों को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
