जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में नक्सली गतिविधियों के फिर से सक्रिय होने की आशंका के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी और तलाशी अभियान तेज कर दिया है। खुफिया सूचनाओं के अनुसार, प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के वांछित नेता राम प्रकाश मार्डी उर्फ सचिन का दस्ता बोड़ाम और झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा से सटे जंगलों में देखा गया है। इसके बाद पुलिस और खुफिया विभाग पूरी तरह सतर्क हो गए हैं।
बोड़ाम और दलमा के जंगल बन रहे संभावित ठिकाना
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा और कोल्हान क्षेत्रों में लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों तथा नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना से माओवादियों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में वे नए ठिकानों की तलाश में पूर्वी सिंहभूम की ओर रुख कर रहे हैं। बोड़ाम-पटमदा के घने जंगल, दलमा वन क्षेत्र और पश्चिम बंगाल के अयोध्या पहाड़ियों से जुड़े सीमावर्ती इलाके माओवादियों के लिए सुरक्षित ठिकाने साबित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए निगरानी को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।
15 लाख का इनामी नक्सली एजेंसियों के निशाने पर
राम प्रकाश मार्डी उर्फ सचिन प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का रीजनल कमेटी सदस्य है और क्षेत्र के सबसे वांछित नक्सली नेताओं में शामिल है। पटमदा के झुंझका गांव निवासी सचिन की गिरफ्तारी पर झारखंड सरकार ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक वह आमतौर पर हथियारबंद दस्ते के साथ चलता है और उसके पास आधुनिक हथियार भी मौजूद रहते हैं।
पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड का है मुख्य आरोपी
सचिन और उसका सहयोगी असीम उर्फ आकाश मंडल वर्ष 2007 में घाटशिला के बागुड़िया में हुए पूर्व झामुमो सांसद सुनील महतो हत्याकांड के मुख्य आरोपियों में शामिल हैं। 4 मार्च 2007 को हुए इस हमले में सुनील महतो की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। वर्षों से चल रहे अभियान के बावजूद सचिन और आकाश मंडल समेत कई आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिसके कारण वे सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिक सूची में बने हुए हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ाई गई चौकसी
ताजा खुफिया इनपुट के बाद जिला पुलिस और खुफिया इकाइयों ने ग्रामीण और वन क्षेत्रों में मुखबिर तंत्र सक्रिय कर दिया है। पश्चिम बंगाल सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में गश्त और तलाशी अभियान बढ़ा दिए गए हैं। अंतरराज्यीय सीमा पर बने चेकपोस्टों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और नक्सलियों के संभावित पुनर्गठन को रोका जा सके। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर सचिन की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां खुफिया सूचनाओं की गंभीरता से जांच करते हुए हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।
