यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड जादूगोड़ा माइंस के विस्थापितों का धैर्य अब पूरी तरह जवाब दे चुका है। पिछले तीन दशकों से अपने पुनर्वास और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे चाटीकोचा के ग्रामीणों ने यूसिल प्रबंधन के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों ने प्रबंधन को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
सीएमडी को पत्र: ‘वादाखिलाफी अब बर्दाश्त नहीं’
ग्राम प्रधान मेघराय सोरेन ने यूसिल के सीएमडी को एक कड़ा पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि 9 अप्रैल 2026 को हुई त्रिपक्षीय वार्ता में प्रबंधन ने एक महीने के भीतर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
ग्रामीणों ने इस पत्र की प्रतिलिपि उपायुक्त , पोटका अंचल अधिकारी और जादूगोड़ा थाना प्रभारी को भी भेजी है, जिसमें 15 दिनों के भीतर पुनर्वास करने, अवैध अतिक्रमण हटाने और टेलिंग पॉन्ड में जहरीला कचरा डालना बंद करने की मांग की गई है।
आपात बैठक में लिए गए बड़े फैसले:
7 जून को चाटीकोचा सामुदायिक केंद्र में विस्थापितों की एक आपात बैठक हुई, जिसमें कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी:
- प्रत्येक 12 डिसमिल जमीन के बदले 1 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए या फिर खतियानधारी परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी दी जाए।
- जब तक प्रबंधन ठोस निर्णय नहीं लेता, तब तक माइंस गेट पर आंदोलन किया जाएगा और टेलिंग पॉन्ड में कचरा फेंकने का कड़ा विरोध होगा।
- आंदोलन की अगली रणनीति तय करने के लिए 12 जून को फिर से एक बड़ी बैठक बुलाई गई है, जिसमें हर विस्थापित परिवार से एक सदस्य की उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
30 साल का दर्द: इंसाफ का इंतजार करते-करते दुनिया छोड़ गए कई बुजुर्ग
ग्रामीणों का दर्द बयां करते हुए वक्ताओं ने कहा कि साल 1996 में जिन परिवारों के आशियाने बुलडोजर से जमींदोज कर दिए गए थे, वे आज तीन दशक बाद भी पुनर्वास की राह देख रहे हैं। इंसाफ का इंतजार करते-करते कई बुजुर्ग इस दुनिया से चले गए, लेकिन यूसिल प्रबंधन का दिल नहीं पघला। विस्थापितों के मुताबिक, इस मुद्दे पर अब तक 700 से अधिक वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन हर बार नतीजा शून्य रहा।
रेडिएशन और प्रदूषण का खौफ: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यूसिल का टेलिंग पॉन्ड अब लगभग पूरी तरह भर चुका है, जिससे स्थानीय जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। रेडिएशन युक्त धूलकणों और प्रदूषण के कारण इलाके के लोगों में गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
विधायक संजीव सरदार ने मुख्यमंत्री से की शिकायत
विस्थापितों के इस दर्द और यूसिल प्रबंधन की तानाशाही पर पोटका के स्थानीय विधायक संजीव सरदार ने भी गहरी नाराजगी जताई है। विधायक ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी शिकायत सीधे मुख्यमंत्री से की है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि इस बार भी उनके साथ छल हुआ, तो वे अपनी जमीन और जान बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
