रांची: राजधानी रांची और आसपास के ग्रामीण इलाकों में प्रतिबंधित पोर्टेबल (हैंडी) अल्ट्रासाउंड मशीनों के जरिए अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण का बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका जताई गई है। स्वास्थ्य विभाग को मिली शिकायतों के अनुसार पटना के ब्लैक मार्केट से मशीनें मंगाकर बुंडू, तमाड़, खलारी, बुढ़मू, रातू और चटकपुर समेत कई क्षेत्रों में चोरी-छिपे गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण किया जा रहा है। मामले के सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य समिति और प्रशासन सतर्क हो गया है। कुछ दिन पहले राजधानी के एक निजी प्रतिष्ठान में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से अवैध जांच करते तीन लोगों को पकड़ा गया था। जांच के दौरान एक इंटर पास महिला मशीन संचालित करती मिली थी। जिस स्थान पर जांच हो रही थी, वहां कोई अधिकृत साइन बोर्ड भी नहीं था।
सूत्रों के अनुसार यह नेटवर्क एजेंटों की मदद से संचालित होता है। गुमला, लोहरदगा और रामगढ़ समेत विभिन्न जिलों के एजेंट भ्रूण लिंग परीक्षण कराने के इच्छुक दंपतियों को मोटी रकम लेकर तय स्थानों पर भेजते हैं। छापेमारी से बचने के लिए जांच सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच तथा अलग-अलग दिनों, यहां तक कि रविवार को भी की जाती है। पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनों के दुरुपयोग को देखते हुए केंद्र सरकार ने इनके उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। वर्तमान व्यवस्था के तहत केवल पंजीकृत केंद्रों में स्थापित स्थायी मशीनों से ही जांच की अनुमति है।
रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि शिकायतों की जांच कराई जा रही है और संदिग्ध केंद्रों पर जल्द छापेमारी होगी। उन्होंने कहा कि अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम, 1994 के तहत भ्रूण का लिंग बताना, पूछना या उसकी जांच कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। उल्लंघन पर तीन से पांच वर्ष तक की सजा, 50 हजार से एक लाख रुपये तक जुर्माना तथा चिकित्सक का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। हालांकि अल्ट्रासाउंड केंद्रों के लिए रिकॉर्ड संधारण, मशीन पंजीकरण, ऑनलाइन रिपोर्टिंग और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था लागू है, फिर भी पोर्टेबल मशीनों के जरिए संभावित अवैध कारोबार ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते इस नेटवर्क पर अंकुश नहीं लगाया गया तो कन्या भ्रूण हत्या रोकने के प्रयासों को गंभीर चुनौती मिल सकती है।
