जमशेदपुर: पोटका के बर्गीकोचा गांव में रहस्यमयी बीमारी से हड़कंप; एक की मौत के बाद अलर्ट पर स्वास्थ्य विभाग

"स्वास्थ्य संकट: पोटका के बर्गीकोचा गांव में मेडिकल टीम का कैंप; दूषित पानी बना बीमारी की वजह, प्रशासन मुस्तैद।"

Johar News Times
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पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड अंतर्गत हेंसल आमदा पंचायत के बर्गीकोचा गांव में चेचक जैसे लक्षणों वाली एक संक्रामक बीमारी फैलने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। तेज बुखार और शरीर पर दाने निकलने की इस शिकायत के बीच एक 50 वर्षीय ग्रामीण की मौत हो गई है। इस दुखद घटना के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है और गांव में विशेष मेडिकल कैंप लगाकर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

एक की मौत के बाद सामने आए कई मरीज

मिली जानकारी के अनुसार, गांव के रहने वाले हरिश्चंद्र पुरान सबसे पहले इस बीमारी की चपेट में आए थे। तबीयत अत्यधिक बिगड़ने के कारण बीते 2 जून को उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद उनके परिवार के अन्य सदस्यों और ग्राम प्रधान गौरांग पुरान समेत गांव के कई और लोगों में भी ठीक वैसे ही लक्षण दिखाई देने लगे। गांव में बीमारी फैलने की सूचना मिलते ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका की मेडिकल टीम तुरंत गांव पहुंची और मोर्चा संभाला।

स्थिति नियंत्रण में, घर-घर जाकर हो रहा सर्वे

पोटका सीएचसी की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रजनी महाकुड़ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई के बाद अब स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है। उन्होंने कहा:

“प्रभावित लोगों की पहचान कर उनका इलाज शुरू कर दिया गया है। अधिकांश मरीज अब स्वस्थ हो चुके हैं और कुछ को एहतियातन विशेष निगरानी में रखा गया है। हमारी मेडिकल टीम ने गांव में घर-घर जाकर स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया है ताकि कोई भी मरीज छूटने न पाए।”

दूषित पेयजल है मुख्य संदिग्ध; चापाकल किए गए ठीक

शुरुआती जांच और मेडिकल टीम के आकलन के अनुसार, इस बीमारी के फैलने के पीछे दूषित पेयजल को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग से इनपुट मिलने के बाद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की टीम भी तुरंत हरकत में आई। विभाग ने गांव पहुंचकर तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े दो चापाकलों की युद्धस्तर पर मरम्मत की और उन्हें दोबारा चालू कराया, ताकि ग्रामीणों को पीने के लिए साफ पानी मिल सके।

मेडिकल टीम की ग्रामीणों को सख्त सलाह:

गांव में फिलहाल मेडिकल कैंप जारी रहेगा। डॉक्टरों की टीम ने ग्रामीणों को सुरक्षित रहने के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

  • हमेशा पानी को अच्छी तरह उबालकर और छानकर ही पीएं।
  • घरों के आसपास और व्यक्तिगत साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
  • शरीर में जरा सा भी बुखार या दाने निकलने के लक्षण दिखें, तो झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़कर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
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