महामारी के दौर में जिस वर्क फ्रॉम होम (WFH) को कंपनियों और कर्मचारियों ने लाइफसेवर माना था, वही अब एक अदृश्य बीमारी का रूप लेता जा रहा है। जर्नल ‘साइंस’ में प्रकाशित एक चौंकाने वाली नई रिसर्च के मुताबिक, घर से काम करने वाले लोगों में अकेलापन 58% तक बढ़ गया है, जो उन्हें डिप्रेशन, एंग्जायटी और गंभीर मानसिक तनाव की ओर धकेल रहा है।
आइए जानते हैं कि क्यों एंप्लायीज इस सुविधा के लिए अपनी सैलरी तक छोड़ने को तैयार हैं, और क्यों यह उनकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर भारी पड़ रहा है।
सैलरी कटवाने को तैयार, पर घर छोड़ने को नहीं!
न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक की इकोनॉमिस्ट नतालिया इमैनुएल और उनकी टीम द्वारा की गई इस रिसर्च में कुछ बेहद दिलचस्प और चिंताजनक पहलू सामने आए हैं:
- सैलरी का समझौता: लोग घर से काम करने की फ्लेक्सिबिलिटी के लिए अपनी कमाई का 4% से 10% हिस्सा छोड़ने को भी तैयार रहते हैं।
- अदृश्य नुकसान: ‘यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो’ के बिहेवियरल साइंस के प्रोफेसर निकोलस एप्ली का कहना है कि लोग रोज़ के ट्रैफिक और लंबे सफर से तो बच रहे हैं, लेकिन वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि ऑफिस न जाना उनके मानसिक स्वास्थ्य को कितना नुकसान पहुंचा रहा है। इंसान अक्सर सामाजिक जुड़ाव के फायदों को कम आंकता है।
रिमोट vs नॉन-रिमोट जॉब्स: रिसर्च के मुख्य आंकड़े
वैज्ञानिकों ने अमेरिका के पांच बड़े राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के आंकड़ों के आधार पर दो तरह की नौकरियों की तुलना की। इसके जो नतीजे आए, वे डराने वाले हैं:
| मापदंड / असर | रिमोटेबल जॉब्स (जैसे- IT, सॉफ्टवेयर, डिजिटल मार्केटिंग) | नॉन-रिमोटेबल जॉब्स (जैसे- सर्जरी, मैकेनिकल, फील्ड वर्क) |
| अकेले बिताया जाने वाला समय | 58% तक बढ़ गया | सामान्य (टीम/पब्लिक के बीच) |
| पूरा दिन किसी के संपर्क में न आने की संभावना | 72% तक बढ़ गई | बेहद कम |
| अकेले रहने वालों पर असर (No Contact) | 83% तक बढ़ गया (मानसिक तनाव दोगुना) | सामान्य |
बिना किसी मानवीय संपर्क के कट रहे दिन: कई लोगों का पूरा दिन ऐसा गुजर जाता है जब वे किसी से आमने-सामने (Face-to-Face) बात तक नहीं करते। कॉफी शॉप जाने या रास्ते में किसी से हाथ मिलाने तक का मौका उन्हें नहीं मिल रहा है।
काम के बाद भी नहीं बढ़ रहा मेलजोल
इस स्टडी का सबसे हैरान करने वाला निष्कर्ष यह रहा कि वर्क फ्रॉम होम करने वाले लोग काम खत्म होने के बाद भी दोस्तों या रिश्तेदारों से नहीं मिल रहे हैं। यानी ऑफिस में जो सोशल लाइफ खत्म हुई, उसकी भरपाई वे शाम को या छुट्टी के दिन भी नहीं कर पा रहे हैं।
बढ़ रहा है डॉक्टरों और दवाइयों का खर्च
अकेलेपन के कारण कर्मचारियों में निम्नलिखित गंभीर लक्षण देखे जा रहे हैं:
- साइकेट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) के पास जाने वाले लोगों की संख्या में भारी उछाल आया है।
- मनोरोग से जुड़ी दवाओं (Antidepressants/Anti-anxiety pills) का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है।
- लगातार अकेले रहने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो रहा है और दिल व नर्वस सिस्टम पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
एक्सपर्ट्स की सलाह: क्या है इसका समाधान?
खुद को कैसे बचाएं?
अगर आप वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, तो मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए ये आदतें अपनाएं:
- रोज घर से बाहर निकलें: कम से कम कुछ देर के लिए टहलने जरूर जाएं।
- पड़ोसियों से बात करें: छोटी-छोटी बातचीत भी मानसिक तनाव को कम करने में मददगार होती है।
- कम्युनिटी एक्टिविटी: टेनिस खेलें, जिम जाएं या कोई ऐसा हॉबी क्लास जॉइन करें जहां लोगों से आमने-सामने मुलाकात हो सके।
कंपनियों को क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि कंपनियां कर्मचारियों को जबरन ऑफिस बुलाना शुरू कर दें। बल्कि:
- कंपनियों को ऑफिस का माहौल ऐसा बनाना होगा कि लोग वहां स्वेच्छा से आना पसंद करें।
- जब कर्मचारियों को ऑफिस बुलाया जाए, तो यह सुनिश्चित हो कि उनके को-वर्कर्स भी वहां मौजूद हों, ताकि उन्हें असल में बातचीत और टीम बॉन्डिंग का मौका मिले।
