सरायकेला : चांडिल मुख्य बाजार स्थित हरिजन कालिंदी बस्ती में आज भी सैकड़ों परिवार बदहाल परिस्थितियों में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। करीब 1500 से 1800 की आबादी वाली इस दलित बस्ती में सड़क, नाली, शौचालय, पेयजल, आवास और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सुविधाओं का गंभीर अभाव है। बस्तीवासियों का आरोप है कि आजादी के दशकों बाद और झारखंड राज्य बनने के बावजूद विकास यहां तक नहीं पहुंच सका।
स्थानीय लोगों के अनुसार बस्ती में लगभग 80-90 घर हैं, जहां 150 से अधिक परिवार रहते हैं। बरसात के दिनों में हालात और भयावह हो जाते हैं। बाजार क्षेत्र से बहकर आने वाला गंदा नाले का पानी और कचरा सीधे घरों में घुस जाता है। जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण पूरा इलाका कीचड़ और दुर्गंध से भर जाता है। अधिकांश परिवारों के पास शौचालय नहीं है, जिससे लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
बस्तीवासियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना का लाभ अब तक नहीं मिला है। अधिकांश घर जर्जर हैं और बारिश में टपकते रहते हैं। पीने के पानी के लिए लोग एक चापाकल पर निर्भर हैं, जो अक्सर खराब रहता है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि कई परिवारों के राशन कार्ड और पेंशन तक नहीं बने हैं।
बस्ती में एक जर्जर आंगनबाड़ी भवन है, जहां बच्चों को समुचित पोषण और शिक्षा नहीं मिल पा रही। स्थानीय लोगों का दावा है कि सैकड़ों बच्चे कुपोषण के खतरे में हैं, जबकि गर्भवती महिलाएं टीकाकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं।

स्थानीय बुजुर्गों और महिलाओं ने कहा कि चुनाव के समय नेता वादे करने आते हैं, लेकिन बाद में कोई सुध लेने नहीं पहुंचता। कृष्ण कालिंदी ने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर प्रशासन ने पहल नहीं की तो आंदोलन किया जाएगा।
बस्तीवासियों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से तत्काल सड़क, नाली, शौचालय, पेयजल, आंगनबाड़ी और आवास की व्यवस्था करने की मांग की है।
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