झारखंड के पांच प्रमुख शहरों में करीब 1700 करोड़ रुपये की लागत से चल रही बड़ी शहरी जलापूर्ति योजनाएं जमीन विवाद, वन विभाग की मंजूरी और विभिन्न विभागों से एनओसी नहीं मिलने के कारण अधर में लटक गई हैं। इनमें आदित्यपुर, रामगढ़, चक्रधरपुर, देवघर और धनबाद फेज-2 की परियोजनाएं शामिल हैं। हालांकि इन परियोजनाओं में 60 से 76 प्रतिशत तक काम पूरा हो चुका है, लेकिन जरूरी मंजूरियां और भूमि उपलब्ध नहीं होने से निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। नगर विकास विभाग और राज्य शहरी विकास प्राधिकरण (SUDA) ने संबंधित जिला प्रशासन को लंबित मामलों का जल्द समाधान कर भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
आदित्यपुर परियोजना : 76% काम पूरा, वन विभाग की मंजूरी अटकी
आदित्यपुर जलापूर्ति परियोजना की कुल लागत 395.14 करोड़ रुपये है। परियोजना का करीब 76 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 489 किलोमीटर में से 418 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। हालांकि वन भूमि से जुड़े दो प्रस्ताव अभी वन विभाग में लंबित हैं, जिसके कारण आगे का काम रुका हुआ है।
रामगढ़ परियोजना : NOC नहीं मिलने से काम धीमा
रामगढ़ जलापूर्ति योजना की लागत 537.69 करोड़ रुपये है, लेकिन अब तक केवल सात प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। बताया जा रहा है कि भूमि संबंधी एनओसी मिलने में देरी के कारण परियोजना की रफ्तार बेहद धीमी है। इस योजना को सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
चक्रधरपुर परियोजना : 9 साल से अधूरी
चक्रधरपुर जलापूर्ति परियोजना की लागत 49.29 करोड़ रुपये है। इसमें करीब 63 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। योजना के तहत 63.65 किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क और 9,066 घरेलू नल कनेक्शन देने का लक्ष्य है। हालांकि पनसुवा बांध में इंटेक वेल निर्माण के लिए जल संसाधन विभाग की एनओसी लंबित है। इसके अलावा नदी क्रॉसिंग और एनएचएआई की अनुमति नहीं मिलने से पाइपलाइन कार्य बाधित है। यह परियोजना पिछले नौ वर्षों से अधूरी पड़ी है।
देवघर परियोजना : जमीन प्रक्रिया बनी बाधा
देवघर जलापूर्ति योजना की लागत 272.36 करोड़ रुपये है। इसमें अब तक 36 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। परियोजना के लिए 21.51 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, लेकिन जमीन से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। परियोजना एनओसी और भूमि हस्तांतरण के फेर में फंसी हुई है।
धनबाद फेज-2 : सड़क कटिंग अनुमति और भूमि विवाद से अटका काम
धनबाद फेज-2 जलापूर्ति परियोजना की लागत 441.52 करोड़ रुपये है। इसमें 71 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। हालांकि गोगना और कालिपाडही गांव में सड़क कटिंग की अनुमति अभी तक नहीं मिली है। इसके अलावा भूमि विवाद भी परियोजना में बड़ी बाधा बना हुआ है।
कई बैठकें, फिर भी नहीं निकला समाधान
इन पांच परियोजनाओं में आदित्यपुर और रामगढ़ की योजनाएं केंद्र प्रायोजित अमृत और अमृत 2.0 योजना के तहत हैं, जबकि देवघर, धनबाद और चक्रधरपुर परियोजनाएं राज्य प्रायोजित हैं। समस्याओं के समाधान को लेकर संबंधित परियोजनाओं के नोडल अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इसी मुद्दे पर 6 मई को नगर विकास विभाग और सूडा की समीक्षा बैठक भी हुई थी, जिसमें जिला प्रशासन को लंबित अड़चनों को दूर कर जल्द भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
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