सरायकेला: आंधी-तूफान का कहर, नीमडीह में कई रजक परिवार बेघर; पेड़ के नीचे रात काटने को मजबूर, अब तक नहीं पहुंची राहत

कुदरत की मार और सिस्टम की बेरुखी: खुले आसमान के नीचे कटे पीड़ित परिवारों के दिन-रात।

Johar News Times
5 Min Read

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आ रही है। नीमडीह प्रखंड की सामानपुर पंचायत अंतर्गत बामनी हाट टोला में शुक्रवार शाम आए भीषण आंधी-तूफान ने कई गरीब और अनुसूचित जाति परिवारों का आशियाना उजाड़ दिया है। सिर से छत छिन जाने के कारण पीड़ित परिवार इस भीषण गर्मी में खुले आसमान और पेड़ों के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।

तूफान के कारण इलाके में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर गिर गए हैं, जिससे पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूबा हुआ है।

इन परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

शुक्रवार शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच अचानक आए तेज आंधी-तूफान की चपेट में आकर बामनी हाट टोला के कई कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। सबसे ज्यादा नुकसान रजक समुदाय के परिवारों को हुआ है। प्रभावित होने वाले मुख्य नाम निम्नलिखित हैं:

  • संतोष रजक, पिता- युधिष्ठिर रजक
  • अकलू रजक, पिता- युधिष्ठिर रजक
  • नकुल रजक, पिता- स्वर्गीय रूपलाल रजक
  • भूदेव रजक, पिता- विनोद रजक
  • संजय रजक, पिता- युधिष्ठिर रजक
  • रंजीत महतो, पिता- स्वर्गीय कोंका महतो

अनाज, मवेशी और जरूरी कागजात सब हुए नष्ट

आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि इन मकानों के छज्जे और एस्बेस्टस उड़ गए। घरों में रखा धान, चावल, गेहूं जैसी खाद्य सामग्रियां पूरी तरह नष्ट हो गईं। इसके अलावा, कई परिवारों की आजीविका के साधन जैसे मुर्गी, बत्तख और बकरियां भी मलबे की चपेट में आ गईं। पीड़ितों के जरूरी सरकारी और घरेलू कागजात भी आंधी में उड़ गए या बर्बाद हो गए।

हम रोज कमाने-खाने वाले मजदूर हैं। घर उजड़ने से अब सिर छुपाने की जगह तक नहीं बची। अब तो खाने-पीने का भी संकट खड़ा हो गया है।

सरकारी आवास योजनाओं से अब तक वंचित हैं पीड़ित

ग्रामीणों ने भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि ये सभी पीड़ित परिवार बेहद गरीब और मजदूर वर्ग से आते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इन परिवारों को अब तक न तो झारखंड सरकार की अबूआ आवास योजना का लाभ मिला है और न ही केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कोई पक्का मकान मिल सका है।

उजड़े चूल्हे, अंधेरे में डूबा गांव; अब तक नहीं पहुंची सरकारी मदद

घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी समाचार लिखे जाने तक किसी भी जनप्रतिनिधि, प्रखंड प्रशासन या अंचल प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवारों तक कोई राहत सामग्री नहीं पहुंचाई गई थी। मौके पर प्रखंड स्तर का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा था, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। तूफान के कारण बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप है, जिससे बेघर हुए बच्चों और बुजुर्गों की मुश्किलें इस भीषण गर्मी में दोगुनी हो गई हैं।

विस्थापित अधिकार मंच ने की त्वरित कार्रवाई की मांग

घटना की सूचना मिलते ही विस्थापित अधिकार मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो तुरंत बामनी हाट टोला पहुंचे और पीड़ितों से मुलाकात कर उनका दर्द साझा किया। उन्होंने मौके से ही दूरभाष के जरिए प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारी से बात की।

राकेश रंजन महतो ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  1. पीड़ित परिवारों के रहने के लिए तुरंत स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र में वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
  2. सभी प्रभावित एससी परिवारों को अविलंब तिरपाल, राशन और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
  3. भविष्य की सुरक्षा के लिए ‘अबूआ आवास’ या ‘पीएम आवास’ योजना के तहत इन परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर पक्का मकान स्वीकृत किया जाए।

मामले पर संज्ञान लेते हुए नीमडीह के अंचल अधिकारी ने बताया कि राजस्व कर्मी को मौके पर नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आते ही आपदा राहत कोष से नियमानुसार प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी।

Share This Article