नई दिल्ली, भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए। यही वजह रही कि शुक्रवार को बैठक के बाद संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका। इसके बजाय अध्यक्ष की ओर से 63 बिंदुओं वाला एक विस्तृत बयान जारी किया गया, जिसमें सदस्य देशों द्वारा उठाए गए साझा मुद्दों को शामिल किया गया।
सूत्रों के मुताबिक सबसे बड़ा विवाद इजरायल के हमलों की निंदा को लेकर सामने आया। ईरान ने बैठक के दौरान मांग की थी कि ब्रिक्स मंच से ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की स्पष्ट निंदा की जाए। ईरान ने यह आरोप भी लगाया कि ब्रिक्स सदस्य संयुक्त अरब अमीरात ने हमलों में अमेरिका का साथ दिया।
बताया जा रहा है कि इसी मुद्दे पर विदेश मंत्रियों के बीच सहमति नहीं बन पाई, जिसके कारण संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका। बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बिना नाम लिए संयुक्त अरब अमीरात को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। हालांकि सूत्रों का यह भी कहना है कि संयुक्त बयान नहीं आने के पीछे ईरान की दो मुद्दों पर असहमति प्रमुख कारण रही। इनमें पहला मुद्दा समुद्री जलमार्गों में निर्बाध आवाजाही और दूसरा फलस्तीन से जुड़ा था।
अध्यक्ष की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर कुछ सदस्य देशों के विचार अलग-अलग थे। सदस्य देशों ने अपने राष्ट्रीय दृष्टिकोण साझा किए और कई पहलुओं पर चर्चा की। इनमें मौजूदा संकट का जल्द समाधान, संवाद और कूटनीति की आवश्यकता, संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन और समुद्री व्यापार के सुरक्षित एवं निर्बाध संचालन जैसे मुद्दे शामिल रहे। बयान में अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत लगाए जाने वाले एकतरफा दंडात्मक उपायों, खासकर आर्थिक प्रतिबंधों की भी आलोचना की गई। साथ ही वैश्विक मानवीय संकटों से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

फलस्तीन मुद्दे पर ब्रिक्स चेयर की ओर से अपेक्षाकृत मजबूत रुख अपनाया गया। बयान में 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र के गठन का समर्थन किया गया, जिसमें गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक को शामिल करने की बात कही गई। साथ ही संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन की पूर्ण सदस्यता और गाजा में निर्बाध मानवीय सहायता पहुंच सुनिश्चित करने की अपील भी की गई।
