यूएई की बड़ी डील से भारत को राहत, 70% तक बढ़ेगा कच्चे तेल का भंडार

यूएई की बड़ी डील से भारत को राहत, 70% तक बढ़ेगा कच्चे तेल का भंडार

Johar News Times
4 Min Read

नई दिल्ली, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा सहारा मिला है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सरकारी ऊर्जा कंपनी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के साथ हुए अहम समझौते के बाद भारत के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार में करीब 70 फीसदी तक बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक एडीएनओसी ने भारत में अपना क्रूड ऑयल स्टोरेज बढ़ाकर 3 करोड़ बैरल तक करने पर सहमति जताई है। इससे भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व में 40 लाख टन से अधिक कच्चे तेल की अतिरिक्त क्षमता जुड़ जाएगी।

मौजूदा भंडार में होगा बड़ा इजाफा

वर्तमान में भारत के पास 5.3 मिलियन टन यानी करीब 38 मिलियन बैरल का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है। यह भंडार विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर स्थित स्टोरेज केंद्रों में रखा जाता है। यूएई की कंपनी पहले से मंगलुरु में लीज पर ली गई सुविधा में करीब 60 लाख बैरल कच्चा तेल संग्रहित करती है। नई डील के बाद भारत का कुल कच्चा तेल भंडार पहले की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा, जिससे किसी भी वैश्विक संकट या आपूर्ति बाधा की स्थिति में देश को बड़ी राहत मिलेगी।

पश्चिम एशिया संकट के बीच अहम समझौता

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यूएई भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाले शीर्ष पांच देशों में शामिल है। भारत और यूएई के बीच एलएनजी और एलपीजी स्टोरेज बढ़ाने को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ी है। दोनों देशों ने भारत के रणनीतिक भंडार के हिस्से के रूप में फुजैरा में भी क्रूड स्टोरेज से जुड़े अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

रसोई गैस सप्लाई को भी मिलेगा मजबूती

कच्चे तेल के अलावा एडीएनओसी ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के साथ एलपीजी यानी रसोई गैस की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर भी समझौता किया है। अधिकारियों के अनुसार यह समझौता वर्ष 2023 में हुए एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट का विस्तार है, जिससे भारत की दीर्घकालिक गैस आपूर्ति और मजबूत होगी।

दूसरे चरण में नए रिजर्व की तैयारी

केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत 6.5 मिलियन टन क्षमता वाले दो नए कमर्शियल-कम-स्ट्रैटेजिक रिजर्व बनाने की मंजूरी दी थी। ये रिजर्व ओडिशा के चंडीखोल और कर्नाटक के पादुर में विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही सरकार 20 से 30 दिनों का एलपीजी रणनीतिक भंडार तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है, ताकि किसी आपात स्थिति में घरेलू गैस आपूर्ति प्रभावित न हो।

ओपेक से अलग होने के बाद यूएई की नई रणनीति

गौरतलब है कि यूएई ने हाल ही में ओपेक से अलग होने की घोषणा की है। इसके बाद वह बिना उत्पादन कोटे की बाध्यता के तेल उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। वर्तमान में यूएई प्रतिदिन करीब 3 से 3.2 मिलियन बैरल कच्चा तेल उत्पादन करता है, जिसे वह वर्ष 2027 तक बढ़ाकर 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

Share This Article