पोटका प्रखंड की रसुनचोपा पंचायत अंतर्गत सानबासा गांव में भूमिज समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी जनगणना को लेकर ग्रामीणों को जागरूक करना और समाज की जातीय, भाषाई व धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखना था। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि समाज के अस्तित्व को बचाने के लिए हर स्तर पर एकजुटता अनिवार्य है।
जाति, भाषा और धर्म पर समाज का स्पष्ट रुख
बैठक के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि आगामी जनगणना के दौरान समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सही पहचान दर्ज करानी चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित निर्देश तय किए गए:
- जाति: ‘भूमिज’ दर्ज करें।
- भाषा: ‘भूमिज’ दर्ज करें।
- धर्म: ‘सरना’ दर्ज करें।
- विशेष निर्देश: यदि जनगणना फॉर्म में ‘सरना’ का विकल्प नहीं मिलता है, तो ‘अन्य’ (Others) के कॉलम को चुनकर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज करानी है।
“जनगणना केवल आँकड़ा नहीं, हमारे अस्तित्व का आधार है”
बैठक को संबोधित करते हुए समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि जनगणना केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों और पहचान का दस्तावेज है। यदि आज हम अपनी सही जानकारी दर्ज कराने में चूक गए, तो भविष्य में अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को खो देंगे। भूमिज समाज की विशिष्ट परंपराओं और सरना संस्कृति के संरक्षण के लिए अब गाँव-गाँव जाकर जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया गया।
प्रमुख पदाधिकारियों की रही उपस्थिति
इस कार्यक्रम में समाज के पारंपरिक पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति से अभियान को मजबूती दी, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- हातू सरदार: दूदन सरदार
- नाया: विजय सरदार
- देवरी: विन्दा सरदार
- डाकुआ: विकास सरदार
इनके अलावा बैठक में दिलीप सरदार, मानु सरदार, कमल सरदार, रवि सरदार, नमिता सरदार, कुंदन सरदार, राधा रानी सरदार, सीमा सरदार, मनमोहन सरदार, हरीश सरदार, बुधु सरदार और राजेश सरदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष व महिलाएँ मौजूद थे।
पोटका प्रखंड की रसुनचोपा पंचायत अंतर्गत सानबासा गांव में भूमिज समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी जनगणना को लेकर ग्रामीणों को जागरूक करना और समाज की जातीय, भाषाई व धार्मिक पहचान को सुरक्षित रखना था। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि समाज के अस्तित्व को बचाने के लिए हर स्तर पर एकजुटता अनिवार्य है।
जाति, भाषा और धर्म पर समाज का स्पष्ट रुख
बैठक के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि आगामी जनगणना के दौरान समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सही पहचान दर्ज करानी चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित निर्देश तय किए गए:
- ‘भूमिज’ दर्ज करें।
- ‘भूमिज’ दर्ज करें।
- ‘सरना’ दर्ज करें।
- यदि जनगणना फॉर्म में ‘सरना’ का विकल्प नहीं मिलता है, तो ‘अन्य’ के कॉलम को चुनकर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज करानी है।
जनगणना केवल आँकड़ा नहीं, हमारे अस्तित्व का आधार है
बैठक को संबोधित करते हुए समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि जनगणना केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों और पहचान का दस्तावेज है। यदि आज हम अपनी सही जानकारी दर्ज कराने में चूक गए, तो भविष्य में अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को खो देंगे। भूमिज समाज की विशिष्ट परंपराओं और सरना संस्कृति के संरक्षण के लिए अब गाँव-गाँव जाकर जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया गया।
प्रमुख पदाधिकारियों की रही उपस्थिति
इस कार्यक्रम में समाज के पारंपरिक पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति से अभियान को मजबूती दी, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- दूदन सरदार
- विजय सरदार
- विन्दा सरदार
- विकास सरदार
इनके अलावा बैठक में दिलीप सरदार, मानु सरदार, कमल सरदार, रवि सरदार, नमिता सरदार, कुंदन सरदार, राधा रानी सरदार, सीमा सरदार, मनमोहन सरदार, हरीश सरदार, बुधु सरदार और राजेश सरदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष व महिलाएँ मौजूद थे।
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