सच ही कहा गया है कि हौसला जिसका बुलंद रहता है सफलता उसके कदम चूमती है।
पोटका प्रखंड अंतर्गत तेतला पंचायत के 30 वर्षीय किसान सुनील कुमार सरदार ने तरबूजा की खेती कर सफलता की नई मिसाल पेश की है। अगर यह कहा जाए कि सुनील अन्य किसानों के लिए प्रेरणा श्रोत है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। सुनील के पास पांच एकड़ जमीन है।
वह उसमें प्रतिवर्ष धान की खेती करता था। लेकिन वह उस खेती से संतुष्ट नहीं था। क्योंकि खर्च के अनुरूप धान नहीं होता था। वह अभी भी पुराने विधि से ही खेती करते आ रहा था।
धान का खेती कभी अतिवृष्टि तथा कभी अनावृष्टि से प्रभावित होकर काल कवलित हो जय करता था। तब उसने अपने जमीन में नया करने की सोंच पैदा किया। वह प्रखंड के बीटीएम कौशल झा से मिलकर अपनी आपबीती सुनाया। कौशल झा ने आत्मा एक्सटेंशन योजना के तहत सुनील को डिमॉन्सट्रेशन के रूप में तरबूजा का कीट उपलब्ध कराया। जिसमें बीज के साथ साथ खाद भी उपलब्ध कराया गया।
यह बिल्कुल ही निःशुल्क था। ताकि वे आधुनिक तरीके से खेती कर लाभ कमाएं और अन्य किसानों को भी प्रेरित कर सकें।
सुनील कुमार के लिए इस तरह का खेती पहली बार था। इसलिए उन्होंने मात्र एक एकड़ में मैजिक वैरायटी का तरबूजा का खेती किया। यह खेती सुनील के लिए मैजिक स्वीट हो गया। जनवरी माह में उसने बीज लगाया। तीन माह में सुनील ने करीब 20 हजार का तरबूजा बिक्री किया है। अभी भी उत्पादन चालू है।
उसने क्षेत्रीय बाजार हल्दीपोखर में अपने उत्पाद को बिक्री किया। खेती को और बेहतर बनाने के लिए उसे आत्मा के द्वारा 90 प्रतिशत अनुदान पर टपक सिंचाई का उपकरण उपलब्ध कराया गया। जिसके उपयोग से उसे भरपूर लाभ मिला।
सुनील तरबूजा के साथ साथ अन्य सब्जी का भी लघु मात्रा में भिंडी, खीरा, साग आदि का खेती प्रदर्शन के रूप में ही किया। लेकिन इस खेती से वह अब आत्म निर्भर होना चाहता है। उन्होंने बताया कि अगले फसल से वह वृहत मात्रा में तरबूजा तथा अन्य हरा सब्जियों का खेती करेगा।

उनकी सफलता को देखकर आसपास के किसान भी तरबूजा सहित अन्य नकदी फसलों की खेती के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। कृषि विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
पोटका प्रखंड के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक कौशल झा कहते है कि किसानों को यदि सही मोटिवेशन मिले तथा कृषि उत्पादन के लिए जरूरी सहायता की जाए तो निश्चिंत ही यहां के किसान नए तकनीक से खेती करेंगे। इसके लिए प्रखंड के प्रत्येक गांव में किसानों को जागरूक किया जा रहा है।










