8 घंटे सोकर भी नहीं मिट रही थकान? गहरी नींद की कमी और स्लीप एपनिया जैसी बीमारियों का हो सकता है संकेत

नींद की गुणवत्ता सीधे तौर पर हमारी जीवनशैली और खान-पान से भी जुड़ी होती है।

Johar News Times
4 Min Read

अक्सर देखा जाता है कि लोग रात को समय पर बिस्तर पर चले जाते हैं और घड़ी के अनुसार अपनी 8 घंटे की नींद भी पूरी कर लेते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी सुबह ताजगी भरी नहीं होती। सुबह उठते ही शरीर में भारीपन, आंखों में जलन और दिन भर बनी रहने वाली सुस्ती इस बात का प्रमाण है कि शरीर को वह आराम नहीं मिला जिसकी उसे आवश्यकता थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नींद का केवल घंटों में पूरा होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नींद की गहराई और उसकी गुणवत्ता स्वास्थ्य के लिए कहीं अधिक मायने रखती है। जब शरीर असली आराम के स्तर तक नहीं पहुंच पाता, तो वह कई गंभीर बीमारियों की ओर इशारा करने लगता है जिसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सेहत पर भारी पड़ सकता है।

हार्टफोर्ड हेल्थकेयर मेडिकल ग्रुप के स्लीप स्पेशलिस्ट डॉ. स्टीवन थाउ के अनुसार, कई लोग बिस्तर पर पर्याप्त समय तो बिताते हैं लेकिन उनका शरीर विश्राम के उन चरणों तक नहीं पहुंच पाता जहां कोशिकाओं की मरम्मत और ऊर्जा का संचय होता है। दरअसल, नींद की प्रक्रिया हल्की नींद, गहरी नींद और आरईएम (REM) स्लीप जैसे विभिन्न चरणों से गुजरती है। यदि किसी कारणवश रात में बार-बार नींद टूटती रहे या व्यवधान उत्पन्न हो, तो मस्तिष्क गहरी नींद के उस स्तर को प्राप्त नहीं कर पाता जो थकान मिटाने के लिए अनिवार्य है। तनावपूर्ण जीवनशैली, कमरे का शोर, सोने से ठीक पहले मोबाइल स्क्रीन का इस्तेमाल और कैफीन का अधिक सेवन इस प्राकृतिक प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरते हैं।

- Advertisement -
Ad image

इस निरंतर थकान के पीछे ‘स्लीप एपनिया’ जैसी एक गंभीर स्थिति भी छिपी हो सकती है, जो आजकल एक साइलेंट किलर की तरह बढ़ रही है। इस बीमारी में सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है, जिससे ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखने के लिए दिमाग शरीर को बार-बार जागने का संकेत देता है। हालांकि व्यक्ति को इन छोटे-छोटे व्यवधानों का पता नहीं चलता, लेकिन उसकी पूरी नींद का चक्र प्रभावित हो जाता है। इसके संकेतों में तेज खर्राटे लेना, नींद के दौरान घुटन महसूस करना या उठने के बाद भी दिनभर सुस्त बने रहना शामिल है। इसके अतिरिक्त, हमारे शरीर की आंतरिक घड़ी यानी सर्कैडियन रिदम का बिगड़ना भी एक बड़ा कारण है; अनियमित समय पर सोने और जागने की आदत शरीर को भ्रमित कर देती है, जिससे व्यक्ति हमेशा थका हुआ ही अनुभव करता है।

नींद की गुणवत्ता सीधे तौर पर हमारी जीवनशैली और खान-पान से भी जुड़ी होती है। देर रात भारी और मसालेदार भोजन का सेवन या सोने से पहले शराब लेना पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है, जिससे नींद में खलल पड़ता है। शरीर में पानी की कमी भी बेचैनी और थकान का कारण बनती है, जबकि मानसिक चिंता दिमाग को शांत होने से रोकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि एक बेहतर नींद के लिए सोने से पहले शांत माहौल बनाना, गहरी सांस लेने का अभ्यास करना और स्क्रीन से दूरी बनाना अत्यंत आवश्यक है। यदि इन सुधारों के बाद भी थकान कम नहीं होती, तो इसे महज काम का बोझ न समझकर डॉक्टरी परामर्श लेना ही उचित विकल्प है।

- Advertisement -
Ad image

Share This Article