ईचागढ़ में हाथी-मानव संघर्ष का खौफनाक सच: बालू माफियाओं ने उजाड़ा हाथियों का कॉरिडोर, एक ही परिवार के 4 की मौत

Johar News Times
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सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड स्थित हार्डआत गांव में जंगली हाथी के हमले में एक ही परिवार के 4 सदस्यों (मां-बेटी समेत) की दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। इस घटना के बाद वन विभाग ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। वनरक्षी वशिष्ठ नारायण महतो ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि जल-जंगल और जमीन की अंधाधुंध लूट का नतीजा है।

बालू माफियाओं के शोर में भटके गजराज

वनरक्षी वशिष्ठ नारायण महतो के अनुसार, कांची और करकरी नदी के किनारों पर रात-दिन चलने वाली जेसीबी, हाईवा और उनकी तेज रोशनी ने हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर को बाधित कर दिया है। अवैध खनन के कारण नदियों के किनारे के जंगल उजड़ चुके हैं, जिससे हाथियों को न तो पर्याप्त भोजन मिल रहा है और न ही पानी। इसी कारण हाथी भटककर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।

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“शिलाजीत” और वन भूमि पर अवैध भंडारण का खेल

जांच में यह गंभीर मामला सामने आया है कि ईचागढ़ और तिरुलडीह थाना क्षेत्रों में स्वर्णरेखा नदी से अवैध रूप से बालू उठाकर वन क्षेत्र के भीतर डंप किया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, “शिलाजीत” नामक व्यक्ति द्वारा नियमों को ताक पर रखकर वन सीमा के अंदर बालू का भंडारण किया जा रहा है। यह वन संरक्षण अधिनियम 1980 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का सीधा उल्लंघन है। सवाल यह उठता है कि आखिर किसकी शह पर वन क्षेत्र के भीतर इस तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए रास्ता दिया गया?

प्रशासन की कार्रवाई: अवैध रास्तों पर खोदे गए ट्रेंच

घटना की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह के निर्देश पर जिला खनन विभाग और ईचागढ़ पुलिस ने सोड़ो, जारगोडीह, पुरानडीह और वीरडीह बालू घाटों पर औचक छापेमारी की। हालांकि मौके पर कोई वाहन नहीं मिला, लेकिन ट्रैक्टरों के टायरों के निशान पाए गए। भविष्य में अवैध परिवहन रोकने के लिए प्रशासन ने इन गुप्त रास्तों पर अवरोध गर्त (ट्रेंच) खोदकर मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है।

आपदा से बचने के लिए वन विभाग की अपील

वनरक्षी महतो ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है:

  • शाम 6 से सुबह 6 बजे तक नदी या जंगल की ओर न जाएं।
  • खेतों की सुरक्षा के लिए मिर्च पाउडर या मधुमक्खी के बक्से का प्रयोग करें।
  • हाथी दिखने पर टोल फ्री नंबर 1926 या 1800-345-1947 पर तुरंत सूचना दें।

डीएफओ सरायकेला ने बताया कि मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा और बालू माफियाओं के खिलाफ पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया जाएगा।

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