बिहार में गहराता सुरक्षा का संकट: क्या दावों के बीच सच में लौट पाएगा ‘रामराज्य’?

Johar News Times
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पटना/बिहार: बिहार में हाल के दिनों में अपराध के बदलते स्वरूप और बढ़ती वारदातों ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। ‘रामराज्य’ और सुशासन के दावों के बीच आम जनता के मन में असुरक्षा की भावना घर करने लगी है। गया-पटना रेलखंड पर घटी हालिया भयावह घटना, जहां ट्रेन रोककर एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया, उसने न केवल समाज को झकझोर दिया है, बल्कि अपराधियों के बेखौफ मनोबल की पोल भी खोल दी है।

अपराध का बढ़ता ग्राफ और बेखौफ अपराधी राजधानी पटना से लेकर मुजफ्फरपुर, भागलपुर और गया तक, स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मामूली विवादों में गोलियां चलना, दिनदहाड़े लूट और संगठित अपराध अब आम खबरें बनती जा रही हैं। गया की घटना ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी अब सार्वजनिक परिवहन और सुरक्षा घेरे में सेंध लगाने से भी नहीं कतरा रहे। चार दरिंदों द्वारा ट्रेन रोककर युवती को उतारना और इस घृणित अपराध को अंजाम देना, सीधे तौर पर व्यवस्था को चुनौती है।

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महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल सिर्फ गया ही नहीं, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे जिलों से भी महिलाओं के खिलाफ अपराध की खबरें लगातार आ रही हैं। सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा अब एक बड़ा मुद्दा बन गई है। जब ट्रेन जैसे स्थानों पर बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो सड़कों और मोहल्लों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

संगठित अपराध और रंगदारी का साया जमीन विवाद, ठेकेदारी और रंगदारी से जुड़े मामलों में अपराधियों का दबदबा बढ़ता दिख रहा है। व्यापारियों को धमकाना और विरोध करने पर हिंसा का सहारा लेना, यह दर्शाता है कि कानून का डर अपराधियों के मन से समाप्त होता जा रहा है।

प्रशासनिक चुनौती और आत्ममंथन की जरूरत हालांकि पुलिस कई मामलों में त्वरित कार्रवाई कर संदिग्धों को पकड़ रही है, लेकिन सवाल यह है कि अपराध होने ही क्यों दिया जा रहा है? केवल घटना के बाद की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; जरूरत अपराध को रोकने की है। बेरोजगारी, शिक्षा का अभाव और कानून के क्रियान्वयन में ढील इस स्थिति के मुख्य कारण माने जा रहे हैं।

बिहार की जनता आज पूछ रही है कि क्या वह ‘रामराज्य’ केवल नारों तक सीमित रहेगा या धरातल पर भी हर नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर पाएगा? सरकार और प्रशासन के लिए यह आत्ममंथन और कड़े फैसले लेने का समय है।

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