बंगाल में बॉर्डर पर फेंसिंग लगाने पहुंची BSF, बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर तेज हुई फेंसिंग, ग्रामीणों में खुशी; बोले- अब नहीं कटेगी फसल, रातों की चिंता होगी खत्म

बंगाल में बॉर्डर पर फेंसिंग लगाने पहुंची BSF, बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर तेज हुई फेंसिंग, ग्रामीणों में खुशी; बोले- अब नहीं कटेगी फसल, रातों की चिंता होगी खत्म

Johar News Times
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मुर्शिदाबाद : पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर लंबे समय से लंबित फेंसिंग कार्य अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीमा के संवेदनशील इलाकों में बीएसएफ की ओर से सीमांकन और फेंसिंग की प्रक्रिया शुरू होने पर स्थानीय ग्रामीणों ने खुशी जताते हुए मिठाइयां बांटी। ग्रामीणों का कहना है कि फेंसिंग होने से सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और फसलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर रोक लगेगी। मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी बाजार स्थित जीरो लाइन के समीप बसे सकारपाड़ा गांव में बीएसएफ की टीम जब सीमांकन के लिए पहुंची, तो ग्रामीणों ने इसका स्वागत किया। करीब चार हजार आबादी और 2500 मतदाताओं वाले इस गांव के अधिकांश लोग खेती पर निर्भर हैं। गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि घरों के बाद सीधे खेत और खेतों के बाद बांग्लादेश की सीमा शुरू हो जाती है।

ग्रामीण बोले- शाम के बाद खेतों में जाने से भी डर लगता था
ग्राम पंचायत सदस्य पिंटू मंडल ने बताया कि स्थानीय किसानों को शाम पांच बजे के बाद खेतों में जाने की अनुमति नहीं होती थी, जबकि सीमा पार से लोग किसी भी समय खेतों में घुसकर फसल काट ले जाते थे। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में शायद ही कोई महीना ऐसा गुजरा हो, जब इस मुद्दे को लेकर विवाद न हुआ हो। अब फेंसिंग शुरू होने से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। ग्रामीणों के अनुसार, बीएसएफ जवान सीमा पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत माइक से चेतावनी देते हैं, जिससे सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है। लोगों का कहना है कि अब वे अपनी फसलों को लेकर पहले से अधिक निश्चिंत महसूस कर रहे हैं।

27 किलोमीटर भूमि बीएसएफ को सौंपी गई
राज्य में नई सरकार बनने के बाद अब तक सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए बीएसएफ को 27 किलोमीटर क्षेत्र उपलब्ध कराया जा चुका है। इनमें 18 किलोमीटर हिस्से में फेंसिंग और नौ किलोमीटर क्षेत्र में बॉर्डर आउट पोस्ट विकसित करने की योजना है। फिलहाल जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, सिलीगुड़ी, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती जिलों में कार्य शुरू किया गया है। पिछले कुछ दिनों में मुर्शिदाबाद और कूचबिहार के कुछ इलाकों में सीमांकन कार्य का विरोध करने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन बीएसएफ ने स्थिति को नियंत्रित कर काम जारी रखा।

45 दिनों में 600 एकड़ भूमि देने का लक्ष्य
सीमा सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने 45 दिनों के भीतर बीएसएफ को 600 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। अब तक सबसे अधिक 38.80 एकड़ भूमि मुर्शिदाबाद, 35.16 एकड़ जलपाईगुड़ी और 22.92 एकड़ कूचबिहार जिले में दी गई है। इस भूमि का उपयोग कंटीले तारों की बाड़, बीएसएफ चौकियों और अन्य सुरक्षा ढांचे के निर्माण में किया जाएगा।

बंगाल की सीमा सबसे लंबी

पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लगभग 2216 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जो भारत में किसी भी राज्य की सबसे लंबी सीमा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार भारत-बांग्लादेश सीमा के अधिकांश हिस्से में फेंसिंग हो चुकी है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अभी कार्य बाकी है। गौरतलब है कि वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया था। उस समय राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए इसे राज्य के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप बताया था। अब सीमा सुरक्षा को लेकर फेंसिंग और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

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