राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार के एक बड़े फैसले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है। अदालत ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को हटाने से इनकार करते हुए उसकी याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल टेलीग्राम पर बैन जारी रहेगा।
जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने कहा— ‘सरकारी फैसले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं’
जस्टिस तेजस कारिया की एकल पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार को सुनाया गया। अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए उठाए गए इस त्वरित कदम को सही ठहराया और सरकार के आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया।
सरकार की दलील: ‘लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर, दुरुपयोग रोकना जरूरी’
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत में पुरजोर तरीके से अपना पक्ष रखा। सरकार ने कहा:
“यह मामला लाखों छात्रों के भविष्य और देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक की शुचिता से जुड़ा है। परीक्षा सामग्री के लीक होने, संवेदनशील डेटा के प्रसार और इसके किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रशासन को आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत त्वरित और प्रभावी कदम उठाने का पूरा अधिकार है।”
टेलीग्राम का तर्क: ‘चंद लोगों की गलती के लिए पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना गलत’
वहीं, दूसरी ओर प्रतिबंध का विरोध करते हुए टेलीग्राम के वकीलों ने दलील दी कि किसी एक परीक्षा से जुड़े मामले के कारण पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक कर देना न्यायसंगत नहीं है। इस मंच का उपयोग लाखों लोग व्यापार, रोजमर्रा के संचार और अन्य वैध गतिविधियों के लिए करते हैं। ऐसे में पूरा प्लेटफॉर्म बंद होने से आम उपयोगकर्ताओं के अधिकार प्रभावित होते हैं।
कोर्ट का रुख: अधिकारों और सार्वजनिक हित में संतुलन जरूरी
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बिंदु पर भी विचार किया कि क्या कुछ उपद्रवी तत्वों की गतिविधियों के कारण सभी उपयोगकर्ताओं के अधिकार सीमित किए जा सकते हैं? लेकिन अंततः, मामले की संवेदनशीलता, राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की सुरक्षा और व्यापक सार्वजनिक हित को सर्वोपरि मानते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के प्रतिबंध के आदेश को सही और बरकरार रखने का फैसला सुनाया।
