चांडिल प्रखंड अंतर्गत रसुनिया गांव में गुरुवार की रात लोक संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था सार्वजनिक रोहिन मेला कमेटी द्वारा आयोजित विराट महिला छऊ नृत्य कार्यक्रम का, जो देर रात तक पूरे उत्साह और उमंग के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले से आईं प्रसिद्ध महिला छऊ नृत्य मंडलियों ने अपनी शानदार और जीवंत प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसैलाब को मंत्रमुग्ध कर दिया। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे हजारों दर्शकों ने पूरी रात जागकर इस पारंपरिक नृत्य का आनंद उठाया।
मुख्य अतिथि पप्पू वर्मा ने फीता काटकर किया उद्घाटन
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन भाजपा जिला मंत्री पप्पू वर्मा ने फीता काटकर किया। इस गरिमामयी अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में रसुनिया पंचायत के मुखिया मंगल माझी, गम्हरिया निवासी देवराज महतो, शैलेंद्र महतो, कृष्णा कालिंदी तथा विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष उपस्थित रहे। मेला कमेटी की ओर से सभी अतिथियों को पारंपरिक अंगवस्त्र ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
“रोहिन पर्व झारखंड की लोक संस्कृति, कृषि परंपरा और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। खरीफ फसल की बुआई की शुरुआत से ठीक पहले मनाया जाने वाला यह पर्व हमारी माटी से जुड़ा है। आज बेटियां भी पुरुषों के वर्चस्व वाले इस नृत्य में मुखौटा पहनकर पौराणिक आख्यानों को मंच पर जीवंत कर रही हैं, जो पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है।” — पप्पू वर्मा, जिला मंत्री, भाजपा
मेले के मुख्य आकर्षण में पुरुलिया से आईं तीन महिला छऊ नृत्य पार्टियां शामिल रहीं। कलाकारों ने वीर रस और भक्ति रस से सराबोर कई पौराणिक प्रसंगों का मंचन किया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध के दृश्य पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं।
- अर्जुन और भगवान शिव के बीच हुए मल्ल युद्ध के करतबों ने लोगों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
- इस प्रस्तुति ने पूरे माहौल को भक्तिमय कर दिया।
ढोल, शहनाई और धमसा की पारंपरिक थाप पर महिला कलाकारों के हैरतअंगेज करतबों को देखने के लिए लोग कड़ाके की उमंग के बीच देर रात तक डटे रहे। इसके अलावा स्थानीय महिला समितियों द्वारा प्रस्तुत झूमर और पाइका नृत्य ने भी कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
सार्वजनिक रोहिन मेला कमेटी के अध्यक्ष ने आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि रोहिन के पावन अवसर पर हर वर्ष इस मेले और नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य आधुनिकता के दौर में हमारी लुप्त होती लोक कलाओं को बचाना, नई पीढ़ी को इससे जोड़ना और ग्रामीण महिला प्रतिभाओं को एक बड़ा मंच प्रदान करना है। इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्राम प्रधान, युवा क्लब और महिला मंडल के सदस्यों ने सराहनीय भूमिका निभाई।
