झारखंड के सरायकेला अंतर्गत कुकड़ू प्रखंड क्षेत्र के मौजा सपादा में प्रस्तावित बालू घाट के संचालन को लेकर विवाद गहरा गया है। बालू घाट संचालन के विरोध में आयोजित एक महत्वपूर्ण ग्राम सभा में ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बिना स्पष्ट सीमांकन और स्थानीय रोजगार की गारंटी के वे किसी भी कीमत पर नदी से बालू का उठाव नहीं होने देंगे।
ग्राम प्रधान बासुदेव सिंह मुंडा की अध्यक्षता और कुकड़ू अंचल अधिकारी की उपस्थिति में हुई इस बैठक में ग्रामीणों का गुस्सा साफ देखने को मिला।
मशीनों से बालू उठाने का विरोध, PESA एक्ट का हवाला
बैठक में जिला खनन विभाग द्वारा ई-नीलामी के जरिए चुनी गई कोलकाता की एजेंसी ‘गो-क्वेस्ट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड’ के माध्यम से बालू घाट संचालन के प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी। लेकिन ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों की चिंताओं और ग्राम सभा के अधिकारों को दरकिनार कर जबरन इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
ग्राम प्रधान ने प्रशासन को याद दिलाते हुए कहा कि PESA एक्ट 1996 और झारखंड पंचायत राज अधिनियम के तहत, अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की लिखित सहमति के बिना किसी भी तरह का खनन कार्य पूरी तरह गैर-कानूनी है।
ग्राम सभा में सर्वसम्मति से पारित हुए ये 5 बड़े प्रस्ताव:
- 1. जब तक पूरे घाट क्षेत्र का भौतिक सत्यापन कर सीमा तय नहीं की जाती, बालू का उठाव बंद रहेगा।
- 2. ग्रामीणों ने हैवी मशीनों से बालू उठाने का कड़ा विरोध किया। मांग है कि केवल हाथ से बालू निकाला जाए ताकि स्थानीय पर्यावरण सुरक्षित रहे।
- 3. बालू घाट पर बाहरी मजदूरों की भर्ती पर रोक लगे। ट्रैक्टर और मजदूरी के काम में सिर्फ स्थानीय ग्रामीणों को ही प्राथमिकता दी जाए।
- 4 नदी के किनारोंसे 50 मीटर की दूरी तक बालू उठाव पूरी तरह प्रतिबंधित हो। इसके अलावा, ट्रैक्टरों के लिए अलग रास्ता बने ताकि किसानों की फसलें बर्बाद न हों।
- 5. बालू घाट से सरकार और कंपनी को होने वाली आय का 25 प्रतिशत हिस्सा सीधे ग्राम विकास समिति को मिले, जिससे गांव की मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जा सके।
प्रशासन और कंपनी का रुख
ग्रामीणों के कड़े तेवर देखने के बाद कुकड़ू के अंचल अधिकारी ने आश्वस्त किया कि ग्रामीणों की लिखित मांगों और प्रस्तावों को जिला खनन पदाधिकारी और उपायुक्त तक भेजा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिया कि जब तक सीमांकन और ग्राम सभा की फाइनल सहमति नहीं होती, खनन कार्य शुरू नहीं होगा।
दूसरी ओर, गो-क्वेस्ट सॉल्यूशन कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा कि कंपनी पूरी तरह से नियमों के दायरे में रहकर काम करेगी। उन्होंने स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया और कहा कि जल्द ही सीमांकन के लिए एक सर्वे टीम गांव भेजी जाएगी।
इस बैठक में मुखिया सुधीर सिंह, ग्राम प्रधान पीताम्बर सिंघमंकी, पूर्व प्रमुख शंकर सिंह मुंडा, गौरांग प्रामाणिक, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, माझी बाबा, महिला समिति की सदस्य समेत करीब 200 से अधिक ग्रामीण उपस्थित थे।
